1.55 लाख रुपये के जुर्माने की सजा भी बरकरार
ऊपरी अदालत ने आरोपी की याचिका की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहड़ू ने आरोपी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई आठ महीने की साधारण कैद और 1.55 लाख रुपये के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। दोषी को अब निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है।
यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने सुनाया। दीवान सिंह को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। शिकायतकर्ता महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि दीवान सिंह ने 25 जनवरी 2020 को उनसे 1.50 लाख रुपये उधार लिए थे। इस राशि के भुगतान के लिए दीवान सिंह ने अगस्त 2020 को 1.50,000 रुपये का चेक जारी किया। यह चेक बैंक में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया था। महेंद्र सिंह ने दीवान सिंह को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। निचली अदालत ने दीवान सिंह को दोषी ठहराया।
दीवान सिंह ने अपनी अपील में कहा था कि उसने केवल 50 हजार रुपये उधार लिए थे। उसने दावा किया कि 30 हजार रुपये पहले ही लौटा दिए गए हैं। दीवान सिंह ने यह भी दलील दी कि चेक सुरक्षा के लिए दिया गया था और उसका दुरुपयोग किया गया। उसने कानूनी नोटिस मिलने से भी इन्कार किया। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि दीवान सिंह चेक पर अपने हस्ताक्षर से इन्कार नहीं कर सका। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 139 के तहत ऋण या दायित्व की धारणा बनती है। अभियुक्त इस धारणा को विश्वसनीय सबूतों से खंडित करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि सुरक्षा के तौर पर जारी चेक भी कानूनी दायित्व को आकर्षित कर सकता है।