एक करोड़ से अधिक की लागत से काष्ठकुणी शैली में बना मंदिर, दो दिन चलेगा अनुष्ठान
देवता बौंद्रा महाराज, डोरिया महासू देवता महाराज हनोल और परशुराम बटाड़ी देवलुओं के साथ पहुंचे
शिखा पूजन की आज निभाई जाएगी मुख्य रस्म
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से बना मंदिर, मेहमानों के ठहरने की विशेष व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। उपमंडल रोहड़ू की बशला पंचायत में नवनिर्मित महासू देवता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शनिवार से शुरू हो गया। यह मंदिर काष्ठकुणी शैली से एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इसके निर्माण में करीब पांच वर्ष का समय लगा है।
शनिवार को संघेड़ा रस्म के हुई। मेजबान देवता महासू बशला के निमंत्रण पर मंडलगढ़ गौड़ी के आराध्य देवता बौंद्रा महाराज, डोरिया महासू देवता महाराज हनोल और परशुराम बटाड़ी देवलुओं के साथ पहुंचे। रविवार को अनुष्ठान के दौरान शिखा पूजन की मुख्य रस्म निभाई जाएगी।
शनिवार शाम चार बजे के बाद अनुष्ठान स्थल पर देवताओं का आगमन शुरू हुआ। देवताओं के साथ देवलु भी पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य करते हुए पहुंचे। बशला में मंदिर कमेटी की ओर से मेहमान देवलुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
मंदिर कमेटी के मोतमीन बालकृष्ण मेहता ने बताया कि काष्ठकुणी शैली में निर्मित मंदिर के निर्माण पर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है। मंदिर निर्माण में बशला गांव के लोगों के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों के श्रद्धालुओं और दानदाताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बशला पंचायत प्रधान वनीत मेहता ने कहा कि बाहर से आने वाले मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों में की है। 12 जुलाई को मंदिर कमेटी सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन करेगी।