रामपुर बुशहर। कोविड महामारी के शुरूआती दौर में लॉकडाउन के बाद ग्रामीणों रूटों और रविवार को बंद किए लोकल बस रूटों को बहाल करने की मांग को लेकर सीपीएम ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बस अड्डा रामपुर में लोगों की समस्याओं को लेकर एचआरटीसी क्षेत्रीय प्रबंधक रामपुर और प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीपीएम लोकल कमेटी रामपुर के सचिव कुलदीप सिंह, दिनेश मेहता, बिहारी सेवगी, प्रेम चौहान, रंजीत ठाकुर और योगेंद्र ने कहा कि कोरोना महामारी की आपदा को हिमाचल प्रदेश सरकार ने अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। नव उदारवादी नीतियों को लागू करके आम जनता को राहत देने के बजाए प्रदेश सरकार ने सेवाओं में कटौती करके जीवन में आर्थिक बोझ डाला है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के रामपुर, निरमंड, ननखड़ी और कुमारसैन आदि क्षेत्रों के ग्रामीण रूट पिछले डेढ़ साल से बंद हैं।
रविवार के दिन अभी तक कोई भी लोकल बस रूट बहाल नहीं किए गए हैं। इससे मजदूरों, छात्रों और किसानों को सरकारी परिवहन की सुविधा नहीं मिलने से टैक्सियों और निजी वाहनों की लूट का शिकार होना पड़ रहा है। इससे आम जनता को लोकल बस न चलने से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्राइवेट ऑपरेटर के साथ सरकार की मिलीभगत के कारण फायदे वाले बस रूटों से सरकारी बस को हटाकर प्राइवेट ऑपरेटर को रूट देकर फायदा पहुुंचाने का काम सरकार कर रही है।
सीपीएम लोकल कमेटी ने सरकार और क्षेत्रीय प्रबंधक को चेतावनी दी कि अगर बंद पड़े रूटों और रविवार के दिन सभी लोकल बसों को चलाने, निर्धारित समय में ही बसों को चलाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो जनता को लामबंद करते हुए उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर साहिल, अमन, प्रियंका, कुलदीप, कबीर, रविंद्र, नीमू, सामी राम, हरदयाल, चुनी लाल, लता, नरेश, मोहित, राजेश, अनिल और मनोज सहित कई अन्य मौजूद रहे।
कमेटी का कहना है कि रामपुर बस डिपो के अंदर जयराम सरकार के दौरान एक भी नई बस नहीं आई है, जो बसें खराब हुई हैं, उनको भी ठीक नहीं किया गया है। इसके चलते चल रहे कई बसों के रूट बंद किए गए हैं। इससे साफ है कि प्रदेश सरकार एचआरटीसी को कमजोर करके आम जनता को निजी ऑपरेटर और टैक्सी के हवाले करके आर्थिक बोझ डालने का काम कर रही है।