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मजूदरों के लंबे संघर्षो के बाद अस्तित्व में आया श्रमिक कल्याण बोर्ड : प्रेम

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आनी (कुल्लू)। भवन एवं सड़क निर्माण कामगार यूनियन संबंधित सीटू का आनी में एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश सीटू के महासचिव प्रेम गौतम विशेष रूप मौजूद रहे। सीटू महासचिव ने संबोधित करते कहा कि श्रमिक कल्याण बोर्ड का गठन मजदूरों के लंबे संघर्षों के बाद हुआ है। इसमें सीटू ने मुख्य भूमिका निभाई। वर्ष 1996 में एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्री के समय में इसका गठन किया गया था, जब तीसरे मोर्चे की सरकार बनी थी। इसमें मनरेगा के मजदूरों को भी जोड़ा गया। हिमाचल प्रदेश में सीटू की कानूनी लड़ाई और संघर्षों के बाद 2009 में बोर्ड का गठन करना पड़ा।
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मौजूदा शासक वर्ग बोर्ड को अपने अधीन करना चाहते हैं। बोर्ड से मिलने वाले फायदे भी समय पर नहीं मिलते, न ही समय पर पंजीकरण हो पाता है। उन्होंने मांग उठाई कि सरकार को बोर्ड को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। सरकार हर साल मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है। सम्मेलन में हिमाचल किसान सभा के महासचिव ओंकार शाद ने शुभकामनाएं दीं। साथ ही एकजुट और संघर्षों को तेज करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अमीर और अमीर, गरीब और गरीब होता जा रहा है। यह सरकार की नीतियों के कारण हो रहा है। बाद में भवन एवं सड़क निर्माण कामगार यूनियन संबंधित सीटू आनी की नई कमेटी का गठन किया गया है। इसमें 21 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया। इसमें अध्यक्ष पद्म प्रभाकर, उपाध्यक्ष रंजना शर्मा, दसमीं राम, महासचिव मिलाप, सहसचिव लता, सुषमा, सतीश और कोषाध्यक्ष हेमराज को बनाया गया। विजया, देवेंद्र, कुमार, नंतराम, लता, प्रेम, ओम प्रकाश, सुरेश टिकम, प्रेमलता और आशा देवी को भी शामिल किया गया।
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