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चिखड़ के बिशु मेले चोल्टू नृत्य से बांधा समां

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शड़ी और गनोड़ी के देवलू चोलतु नृत्य करते हुए - फोटो : RAMPUR-HP
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ठियोग (रामपुर बुशहर)। अठारह ठकरेई की जेठी देवठी चिखड़ में एक दिवसीय बिशु नृत्य मेले में देवलुओं ने चोल्टू नृत्य से खूब समां बांधा। इसमें दो देवठियों में मां महेश्वरी देवी की देवठी शड़ी और देवता कनलेश्वर महादेव की देवठी गनोड़ी के देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया। मेले में हजारों की संख्या में क्षेत्र के लोगों ने शिरकत कर देव नृत्य के गवाह बने।
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खास बात यह है कि इस नृत्य के दौरान कोई गीत नहीं गाया जाता, सिर्फ देव यंत्र बजते हैं और उन्हीं की धुनों पर नृत्य किया जाता है। बिशु नृत्य मेले की बात की जाए तो यह मेला क्योंथल रियासत में सबसे अधिक मनाया जाता है। क्योंथल की रियासतों में इन मेलों को देवकार के रूप में मनाया जाता है। कुछ देवठियों में तो मेले की तिथि भी तय है, वो किसी भी वर्ष बदलती नहीं है लेकिन चिखड़ देवठी में यह देवकार के रूप में नहीं मनाया जाता।
यहां यह मेला सिर्फ मनोरंजन के तौर पर मनाया जाता है। चिखड़ देवठी दो रियासतों की हद पर बनी है, जिसमें एक मधान रियासत और दूसरी ठियोग रियासत है। मधान और ठियोग रियासत की बात करें तो दोनों ही रियासतों में बिशु नृत्य मेले आयोजित नहीं होते थे। इन रियासतों में दैली और रैहली के मेले लगते थे लेकिन समय के साथ कुछ देवठियों ने बिशु मेले को अपनाया है। बिशु नृत्य मेले वैशाख का माह शुरू होते ही हर देवठी में बारी-बारी आयोजित किए जाते हैं और देवलू लवग नृत्य कर इन मेलों में खूब समां बांधते हैं।
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