12 वर्षों से पक्की नहीं हुई चंडी-ब्रांडा-जगोरी सड़क, जान जोखिम में डाल ग्रामीण कर रहे सफर
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21 जुलाई, 2012 को बनाई गई थी सड़क, न नालियां बनीं और न बनाए पैरापिट
मोहन मेहता
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल के दुर्गम क्षेत्र 15/20 की चंडी-ब्रांडा-जगोरी सड़क की हालत बेहद खराब है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 21 जुलाई, 2012 में दुर्गम क्षेत्र चंडी ब्रांडा के लोगों की सुविधा के लिए यह सड़क बनाई गई थी। इसकी लागत करीब पांच करोड़ रुपये आई थी, लेकिन 12 किलोमीटर कच्ची सड़क के लिए केंद्र से बजट मिलने के बावजूद लोक निर्माण विभाग 12 वर्षों से पक्का नहीं कर पाया है। इस कारण चंडी-ब्रांडा की जनता को खस्ताहाल सड़क में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। इस सड़क पर नालियां और पैरापिट तक नहीं बनाए गए हैं। अब ग्रामीणों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। चंडी-ब्रांडा-जगोरी पंचायत के प्रधान किशोरी लाल, पंचायत सदस्य केसर सिंह, सुभाष चंद, बहादुर सिंह, उषा किरण, चंद्र कला, कला, पूर्व पंचायत प्रधान कृष्णा मुखिया, महिला मंडल प्रधान मीना देवी, संतोष कुमारी, उतरा देवी और सुरेंद्र सुनेल और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़क खस्ताहाल है। 12 सालों में लोक निर्माण विभाग न तो सड़क को पक्का करवा पाया और न ही सड़क में नालियां और पैरापिट बना सका। पंचायत प्रधान किशोरी लाल ने बताया कि पंचायत का प्रतिनिधिमंडल कई बार सड़क को पक्का करवाने की मांग को लेकर सरकार और विभाग से मिला, लेकिन विभाग सड़क की दशा सुधारने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा है। क्षेत्र में सभी लोगों के सेब की फसल को मंडियों में ले जाने में भी हर साल असुविधा हो रही है। उन्होंने बताया कि चंडी-ब्रांडा-जगोरी पंचायत का प्रतिनिधिमंडल जल्द एसडीएम रामपुर के जरिये राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेगा। साथ ही लोक निर्माण विभाग रामपुर मंडल के अधिशासी अभियंता को 15 दिनों में सड़क को पक्का करवाने के लिए अल्टीमेटम देंगे। यदि विभाग ने कुछ नहीं किया, तो धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन करेंगे।
सड़क की टारिंग, नालियां और पैरापिट का काम ठेकेदार को अवार्ड हुआ है, लेकिन वह काफी समय से काम नहीं कर रहा है। विभाग ठेकेदार को जल्द टर्मिनेट की प्रक्रिया पूरी कर दूसरे ठेकेदार से काम को पूरा करवाएगा। - शक्ति नेगी, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग रामपुर -संवाद
12 वर्षों से खस्ताहाल चंडीब्रांडा सडक़ पर सफर कर रहे ग्रामीण। संवाद