ग्रामीणों के पास न आय का स्रोत और न ही भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत किन्नौर जिले की 55 गांव जुड़े हैं, जिससे दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर विकास की आस बंधी है, लेकिन योजना के धरातल पर न उतरने से ग्रामीण निराश है और अपने भविष्य को देखते हुए पलायन को मजबूर हैं। ऐसे ही एक पंचायत कुन्नू-चारंग के गांवों से 30 प्रतिशत ग्रामीण पलायन कर चुके हैं। कुन्नू-चारंग पंचायत के पूर्व प्रधान पूर्ण सिंह नेगी ने बताया कि नौतोड़ के मामले राज्यपाल के पास लंबित पड़े हैं और राज्य सरकार की ओर से एफसीए हटाकर नौतोड़ देने की टिप्पणी की जा रही है, लेकिन अभी भी वाइब्रेंट विलेज के तहत आने वाले किन्नौर जिले के 55 गांवों के ग्रामीणों को कोई भी सुविधा नहीं मिल पाई है। नौतोड़ में 20 बीघा तक जमीन मिलने की नीति है और वाइब्रेंट विलेज की ऐसी कोई नीति नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे वाइब्रेंट विलेज के तहत पानी, बिजली, सड़क और बना हुआ घर देने की योजना है, लेकिन वाइब्रेंट विलेज योजना के साल साल पूरे होने पर भी किसी को भी इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
वाइब्रेंट विलेज के तहत 55 गांव के हजारों लोगों ने जमीन के लिए आवेदन कर रखे हैं, लेकिन सभी आवेदन नौतोड़ के साथ सम्मिलित कर लंबित पड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है वाइब्रेंट विलेज के इन आवेदन को नौतोड़ में न लेकर वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत स्वीकृत करके लोगों को लाभ दिया जाए। इन सुविधाओं के न मिलने से कुन्नू-चारंग से 30 प्रतिशत लोगों ने पलायन कर लिया है। पलायन करने के पीछे यह है कि लोगों के पास आय का स्रोत नहीं है और न ही भूमि है। कुन्नू चारंग के साथ साथ हंगरंग वैली के लोगों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। वाइब्रेंट विलेज में राष्ट्रीय की सुरक्षा भी है। केंद्र सरकार की इस नीति को कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते वाइब्रेंट विलेज के लोग शिमला, सोलन, चंडीगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों का पलायन कर रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत मिलने वाली भूमि लाभार्थियों को दी जाए, ताकि लोगों को बाहरी शहरों का पलायन न करना पड़े।