बटसेरी में देवता चांसू याकेस नारायण विदाई लेते हुए
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सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में ऐतिहासिक देव परंपरा का प्रतीक बायोलिंग पर्व चांसू गांव के ईष्ट देवता याकेस नारायण की विदाई के साथ मंगलवार को संपन्न हो गया। इस दौरान हजारों लोग देव मिलन के गवाह बने। पांच दिनों तक चले मेले में देव मिलन के साथ-साथ किन्नौरी नाटी का भी दौर चला। मेले में देवताओं का मिलन प्रमुख रहा, जिसके क्षेत्र के हजारों ग्रामीण गवाह बने।
चांसू गांव के ईष्ट देवता याकेस नारायण पांच दिनों की रस्म अदा करने के बाद बड़े भाई बद्री नारायण, छोटे भाई विष्णु नारायण और तपो नारायण के साथ मिलन के बाद सोमवार चांसू गांव के लिए रवाना हुए। बटसेरी से चांसू गांव के देवता याकेस नारायण अपने कार करिंदों और ग्रामीणों साथ रवाना हुए। इस दौरान लोगों ने नम आंखों से देवता को विदाई दी। अब पांच वर्ष बाद याकेस नारायण देवता चांसू का बटसेरी गांव आना होगा।
वापसी के समय देवता याकेस नारायण अपनी बड़ी बहन माटींगो देवी से आशीर्वाद लेकर वाद्ययंत्रों की धुनों पर झूमते हुए निकले। मंगलवार को देवता याकेस नारायण करीब 11:00 बजे चांसू पहुंचे। उनके पहुंचने पर गांव के लोगों ने देवता और उनके साथ आए सभी लोगों का गर्मजोशी से स्वागत किया। देवता बद्री नाराण के मोतमीन मनोज लोक्टस, पुजारी प्रदीप नेगी, माथास अजेंद्र सिंह नेगी और माली महावीर बिलेन्टू सहित अन्य देवता के मोतमीन और कारकरिंदों ने कहा कि बटसेरी गांव में पांच दिनों तक चले इस विशेष पर्व पर देवताओं ने सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया। इस पर्व को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया।