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मंडियो में दाम धड़ाम, 500 से 1600 रुपये तक बिक रहा एक पेटी सेब

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सेब की बोली लगाते व्यापारी
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अनिल कंवर
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। सितंबर माह से पहले सेब के दामों में आई गिरावट हर रोज बढ़ती ही जा रही है। आलम यह है कि प्रदेश सहित देशभर की मंडियों में सेब के दाम धड़ाम हो गए हैं। इस वजह से ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागवान खासे परेशान हैं। मंगलवार को नारकंडा और मत्याना की सेब मंडियों में सेब के दाम 500 रुपये से लेकर 1,600 रुपये तक ही रहे। इस दौरान मंडियों में कुछ लॉट ही 1,600 से लेकर 1,900 तक बिक सका जबकि सामान्य मार्केट की बात करें तो अधिक से अधिक 1,600 रुपये तक 25 किलो की पेटी को दाम मिल रहे हैं।
बारिश के दौरान मंडियों मे सेब की आदम कम थी, जिस कारण बागवानोंको बेहतर दाम मिले, लेकिन पिछले तीन और चार दिनों से अब सेब की आदम फिर से कम हो गई है, लेकिन दाम बढ़ने के बजाए गिरते जा रहे हैं। इससे बागवान भी परेशान हैं।
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वहीं, आढ़ती लालचंद डोगरा, मनीष मखैक, दलीप कैंथला, अमर मेहता, कुलदीप मेहता और अमित ने बताया कि उच्च गुणवत्ता के सेब का दाम मंडियों में आज भी 1,900 तक चल रहा है, लेकिन बागवान अच्छा सेब कंपनियों को दे रहे हैं और कलरलैस, रसटिंग, ओले वाला और हल्का माल मंडियों में ला रहे हैं। इसका भाव 500 से लेकर 1,500 तक ही मिल पाता है। आढ़तियों की मानें तो कश्मीर का सेब भी मंडियों में आना शुरू हो गया है और आगे वाली मंडियां भी मंदी चल रही है। इससे आने वाले समय में दाम बढ़ने की संभावना कम ही है।
कंपनियों का मत है कि इससे पहले कभी भी कंपनियों ने 70 रुपये प्रति किलो तक सेब के दाम नहीं खोले थे। इस बार कंपनियां हाई रिस्क पर है। 25 से 30 रुपये प्रति किलो 6 माह तक सीए स्टोर सहित अन्य खर्चों में लग जाता है और इस बार सेब 110 रुपये से ऊपर प्रति किलो कंपनियों को बैठेगा। अगर मार्च के बाद सेब का बाजार मंदा रहता है तो कंपनियों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। कंपनियों का दावा है कि इस बार बागवानों को मंडियों से बेहतर दाम वह दे रही हैं, जिस कारण से बागवानों ने कंपनियों की ओर रुख किया है।
सरकार कंपनियों पर लगाम नहीं कसेगी तो होता रहेगा बागवानों का शोषण
बागवान अवितिक, दिशांत नलवा, अनिरुद्ध चौहान, रोहित कौल, विनोद चौहान, हरविंद्र ग्रेक और अजु ठाकुर सहित अन्य बागवानों का कहना है कि हर वर्ष देखा जाए तो जब तक कंपनियां सेब खरीदना शुरू नहीं करती, तब तक बागवानों को सेब के बेहतर दाम मिलते रहते हैं। जैसे ही सीए स्टोर वाले सेब रेट खोलते हैं, वैसे ही सेब के दाम गिर जाते हैं।
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बागवान हर वर्ष इस मांग को उठाते रहते हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती। इसके कारण हम बागवानों को अपनी सालभर की मेहनत के उचित दाम नहीं मिल पाते हैं। जब तक कंपनियों पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक बागवानों का शोषण होता रहेगा।
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