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Rampur Bushahar News: मंडियोंं में गिरने शुरू सेब के दाम, दो दिन में सात से छह साै रुपये प्रति पेटी हुई कम

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33 सौ रुपये प्रति पेटी बिकने वाला सेब पहुंचा 26 सौ रुपये तक
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हिमाचल की मंडियों के अलावा पंचकूला और परवाणू मंडी में कम हुए रेट
सेब के दाम में आई भारी कमी के बाद बागवान निराश
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। पूरे देश की मंडियों में सेब के दाम में गिरावट शुरू हो गई है। दो दिनों में हिमाचल के अलावा पिंजौर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और उत्तराखंड की मंडियोंं में पांच से सात सौ रुपये प्रति पेटी सेब के दाम गिर चुके हैं। पूरे उत्तर भारत की मंडियों में सेब की पहुंच लगातार बढ़ रही है। वहीं, 33 सौ रुपये प्रति पेटी बिकने वाला सेब अब 26 सौ रुपये तक पहुंच गया है। बीते दो दिनों में हरियाणा की फल मंडी में सेब की प्रति पेटी दाम में सात सौ रुपये तक की कमी दर्ज की गई है। पंद्रह अगस्त के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब का तुड़ान शुरू हो चुका है। इससे फल मंडियों में सेब की पहुंच बढ़ना शुरू हो गई है। पहले दो तीन दिनों में रक्षा बंधन की मांग के चलते दाम नहीं घटे। रक्षाबंधन के बाद दो दिनों में दाम में गिरावट आई है। हिमाचल की मंडियों के अलावा पंचकूला व परवाणू मंडी में केवल दो दिनों में सेब के दाम छह से सात सौ रुपये प्रति पेटी तक गिरे हैं। सेब के दाम में दो दिन में आई भारी कमी के बाद बागवान निराश हैं।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अब हुआ तुड़ान शुरू
परवाणू फल मंडी में चिड़गांव से सेब लेकर पहुंचे बागवान सुनेश कुमार ने बताया कि बताया कि पांच दिनों से सेब तुड़ान शुरू किया है। अब मंडियों में पहुंचने पर दो दिनों से दाम में भारी गिरावट आ चुकी है। बागवान सोनू ने बताया कि तीन दिन पहले जो सेब 28 सौ रुपये प्रति पेटी बिका। वीरवार को पिंजौर मंडी में उनको उसी सेब के बाद 22 सौ रुपये मिल रहे हैं। निचले और मध्यम इलाके के बागवानों को सेब के अच्छे दाम हर साल मिलते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अब सेब का तुड़ान शुरू हुआ है और अब बाजार में पहुंच हो रही, जिससे दाम गिरने शुरू हो गए हैं। इससे बागवानों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिल पाता। वहीं, इस साल सूखे कारण सेब का आकार विकसित नहीं हुआ, जिससे पैदावार में पहले ही कमी है। अब मंडियों में दाम गिर चुके हैं। हिमाचल की मंडियों में आढ़ती छोटे आकार के सेब का दाम कुल बोली से तीस प्रतिशत कम पहले ही बागवानों को दे रहे हैं।
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मंडियों तक पहुंचाने में जल्दबाजी न करें
बागवान कच्चे फलों को दाम के चक्कर में मंडियों तक पहुंचाने में जल्दबाजी न करें। इससे खरीदार व बागवान दोनों को नुकसान होता है। मंडियों में अच्छे फलों के उचित दाम मिलने की पूरी संभावना रहती है। अगस्त महीने में अंत में हर साल मंडियों में गिरावट देखने को मिलती रही है। - संजय चौहान, एसएमएस, बागवानी विभाग रोहड़ू
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