सेब के पौधें पर पत्तियों को मुरझता देख चिंतित बागवान
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचे इन दिनों क्लोरोटिक वायरस की चपेट में हैं। इस वायरस से सेब की पत्तियां मुरझा रही हैं। बागवान पत्तियों को मुरझता देख विशेषज्ञों की सलाह के बिना धड़ल्ले से दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बागवानों को वायरस से चिंतित न होने की सलाह दी है। क्लोरोटिक वायरस अपना कार्यकाल पूरा होते ही ठीक हो जाएगा। क्षेत्र के अधिकांश बगीचे क्लोरोटिक वायरस की चपेट में हैं। वायरस से सेब के पौधों की पत्तियां मुरझा रही हैं और पत्तियों पर काले रंग के धब्बे पड़ रहे हैं। पत्तियों को देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे पत्तियां जल गई हों। बागवान इसे अल्टरनेरिया और मार्सोनिना रोग के शुरुआती लक्षण मान रहे हैं, जिसमें समय से पहल पतझड़ होता है।
वहीं, बागवान बिना विशेषज्ञों की सलाह के धड़ल्ले से विभिन्न कंपनियों के फफूंदीनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, जबकि सेब के बगीचों में क्लोरोटिक वायरस फैला हुआ है। यह वायरस किसी भी फफूंदीनाशक और कीटनाशक के छिड़काव से समाप्त नहीं होगा। वायरस एक से डेढ़ माह तक बगीचे में रहेगा। पौधे पर निकली पहली पत्तियों पर वायरस का प्रभाव रहता है। दूसरे चरण में निकली पत्तियों पर वायरस का प्रभाव खुद ही समाप्त हो जाएगा।
बगीचों में इन दिनों क्लोरोटिक वायरस फैला हुआ, लेकिन बागवान बिना किसी सलाह के स्प्रे कर रहे हैं। वायरस किसी भी छिड़काव से नहीं जाएगा। वायरस अपना पूरा समय लेगा। बागवानों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। एक से डेढ़ माह के बाद पौधे पर से वायरस का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
डाॅ. संजय चौहान, विषय विशेषज्ञ, उद्यान विभाग