संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। जिला किन्नौर के प्रवेश द्वार चौरा बैरियर में करीब 20 साल से चौरा बैरियर चादर की शेड में चल रहा है। सेब नियंत्रण कक्ष और चौरा बैरियर की हालत जर्जर बनी हुई है। एक साल से चौरा बैरियर में पुलिस और उद्यान विभाग दोनों का नियंत्रण कक्ष एक ही कमरे से चल रहा है। पुलिस विभाग के नियंत्रण कक्ष के कंप्यूटर और मूलभूत सुविधाओं का लाभ उद्यान विभाग के कर्मचारी ले रहे हैं। उद्यान विभाग के पास हर साल बागवानों के करोड़ों रुपये के सेब कारोबार का डाटा रहता है। इसका सारा लेखा-जोखा रखने के लिए एक आधुनिक तरीके से लैस नियंत्रण कक्ष का होना अति आवश्यक है, ताकि किन्नौर के बागवानों को किसी प्रकार से नुकसान न उठाना पड़े।
सेब नियंत्रण कक्ष में सेब से लदे वाहनों का खाका रखा जाता है। सेब को मंडियों में पहुंचाने का पूरा ब्योरा रखा जाता है। किन्नौर के बागवानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए चौरा बैरियर पर सेब सीजन के दौरान देश की विभिन्न सेब मंडियों में सेब का लेखा-जोखा रखने के लिए सेब नियंत्रण कक्ष खोला जाता है। चौरा बैरियर में उद्यान विभाग के दो कर्मचारी 24 घंटे ड्यूटी देते हैं। यह चादर का शेड लगभग 20 साल पुराना है, जो जर्जर हालत में है। चारों तरफ से यह शेड टूट गया है। हालांकि, जिला प्रशासन किन्नौर ने सेब सीजन के दौरान वाहनों और बॉक्सों के प्रबंधन के लिए हिम सेब ऐप पोर्टल का उपयोग करने का निर्णय लिया था, जिससे सेब से लदे वाहनों के गायब होने और चोरी का पता लगाने में सहायता मिल सके।
चौरा बैरियर सेब नियंत्रण कक्ष के लिए पांच लाख रुपये की लागत से नया भवन बनाने के लिए निदेशक उद्यान विभाग शिमला को बजट स्वीकृति के लिए भेजा है। सरकार की ओर से बजट की स्वीकृति मिलते ही चौरा बैरियर में सेब नियंत्रण कक्ष बनेगा। इस बार हिम सेब ऐप पोर्टल को चलाने के लिए पुलिस और उद्यान विभाग का नियंत्रण कक्ष एक ही कमरे में रखा गया है।
- भूपेंद्र सिंह नेगी, उप निदेशक, उद्यान विभाग किन्नौर