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Rampur Bushahar News: हिमपात के बाद खुला मौसम, बगीचों में काम में जुटे बागवान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहड़ू। हिमपात के बाद मौसम खुलते ही बागवान सेब के बगीचों में कार्य करने में जुट गए हैं। पुराने पौधे नष्ट होने के बाद अब बागवान उनकी जगह नए पौधे लगाने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि बागवान वैज्ञानिक तरीके से बगीचों की देखरेख का कार्य करें। इस महीने के अंत तक इन कार्यों को पूरा करने के लिए बागवानों के पास अभी समय शेष है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के कई इलाकों में बागवानों ने दिसंबर में ही सेब के पेड़ों की काटछांट करने का काम शुरू कर दिया था। दिसंबर से फरवरी तक पेड़ों की काटछांट पौधे की सुप्त अवस्था में ही की जाती है। समय से पहले या बाद में काटछांट से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं, इसलिए बगीचों की देखरेख पौधे लगाने और प्रूनिंग के लिए उचित समय का इंतजार जरूरी है।

कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में काटछांट का फल की गुणवत्ता बनाए रखने में विशेष योगदान रहता है। पेड़ों की काटछांट को सही समय पर करने से कैंकर और वूली एफिड की समस्या कम हो जाती है। अब बारिश के बाद नमी होने पर बागवान बगीचों में तौलिए बना सकते हैं।
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नए पौधे लगाने के लिए चयनित वैरायटी के अनुसार गड्ढे तैयार कर सकते हैं। नए बगीचे को लगाने के लिए पौधों के बीच की दूरी, भूमि की ढलान सहित कई आवश्यक जानकारी होना जरूरी है। इसके लिए लोग विशेषज्ञ से भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा सेब के काटछांट के बाद लोग घाव पर पेस्ट लगाएं। इससे पेड़ों के जख्म जल्दी भरेंगे, पेड़ों को कैंकर और वूली एफिड की बीमारी का असर भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बागवान बगीचों में उर्वरकों का प्रयोग अब बारिश होने के बाद कर सकते हैं।
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