रामपुर बुशहर। राष्ट्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर केंद्र और राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ शुक्रवार को सीटू से संबंधित रामपुर क्षेत्र की सभी यूनियनों ने अपने कार्यस्थलों पर राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस मनाया।
सैकड़ों मजदूरों ने अपने कार्यस्थलों पर एकत्रित होकर केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के रामपुर क्षेत्रीय कमेटी के संयोजक नरेंद्र देष्टा और सह संयोजक नील दत्त ने केंद्र और प्रदेश सरकारों को चेताया है कि वे मजदूर विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचें अन्यथा मजदूर आंदोलन तेज किया जाएगा। कोरोना महामारी के इस संकट काल में सरकारें मजदूरों का खून चूसने और उनका शोषण करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में श्रम कानूनों में बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अन्य प्रदेशों की तरह ही कारखाना अधिनियम 1948 में तब्दीली कर हिमाचल प्रदेश में काम की अवधि को भारत के कई राज्यों में सरकारी अधिसूचना के माध्यम से मजदूरों पर बारह घंटे का कार्य थोप दिया गया है। वर्तमान में प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 और वेतन भुगतान अधिनियम 1936 को पहले ही लागू नहीं किया जाता है। सरकार के इस कदम से मजदूरों का और शोषण होगा। इस अधिसूचना से पूंजीपतियों को मजदूरों की खुली लूट करने का अधिकार मिल गया है, जिसे प्रदेश का मजदूर वर्ग किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेगा। इस विरोध प्रदर्शन में जसबीर, विपिन, प्रेम सिंघानिया, विकेश, मोहन, सुरेंद्र, जोकटा, जितेंद्र, राकेश, रवि, विजय, सुनामनी, ललिता, मंजू, देवेंद्र, कैलाश मेहता, कुलदीप, रिंकू महादेवन, हेम राज, गोविंद, नरेंद्र, भूप सिंह, राजकुमार, सुशील, सीमा, श्याम, आशा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।