जिले में भारी हिमपात से 441 बागवानों के 8353 पौधे हुए क्षतिग्रस्त
किन्नौर की आर्थिकी को पहुंचा करोड़ों का नुकसान
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में इस वर्ष मार्च में हुई भारी बर्फबारी और शरद ऋतु के दौरान से अब तक ग्लेशियरों के आने से बागवानों के बगीचों को 15 लाख, 478 हजार, 135 रुपए का भारी नुकसान हुआ है। जिले के 441 बागवानों के करीब 8353 सेब के पौधे भारी हिमपात से नष्ट हो गए हैं। फिर से बगीचा तैयार करने में अब बागवानों को कई और साल लग जाएंगे। किन्नौर की आर्थिकी का मुख्य स्रोत सेब उत्पादन है। ऐसे में भारी बर्फबारी से सेब उत्पादकों पर कहर बनकर टूटी है। जानकारी के अनुसार, किन्नौर के बागवानी विभाग एवं राजस्व विभाग सहित पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कुल राशि 15,478,135 का आंकलन किया गया है, जिसकी प्रक्रिया अभी भी जारी है। किन्नौर के दूर -दराज क्षेत्रों के गांव में नुकसान का आंकड़ा आने से राशि बढ़ सकती है। किन्नौर में हिमस्खलन और ग्लेशियर से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में पूह खंड के सुन्नम, हांगो, आसरंग और कल्पा ब्लॉक के दूनी, युवारंगी, सापनी, सांगला के साथ निचार ब्लॉक के मीरू, पानवी, चगांव और यांगपा-1 का नुकसान हुआ है। जिले में अब तक 441 बागवानों के 8353 सेब पेड़ क्षतिग्रस्त हुए हैं। अभी तक अनुमानित 15,478,135 का नुकसान पहुंचा है। बागवानी विभाग फलों के पेड़ों के मूल्यांकन मानदंड के अनुसार नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार को भेजी है रिपोर्ट
उप निदेशक बागवानी विभाग किन्नौर भूपेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि किन्नौर में इस शरद ऋतु और मार्च माह में भारी बर्फबारी के कारण बागबानों के 8353 पौधे क्षतिग्रस्त हुए हैं। नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजी गई है।
नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा
उधर, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सेब के पौधों को हुए नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है। अभी दुर्गम क्षेत्रों से नुकसान के आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है।
- संवाद