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निचार के प्रभावितों को एक वर्ष से नहीं मिला मुआवजा

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निचार के प्रभावितों को एक वर्ष
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बाद भी नहीं मिला मुआवजा
बीते वर्ष ओलावृष्टि से 200 मीट्रिक सेब हुआ था तबाह
साढ़े 21 करोड़ के नुकसान का किया था आंकलन
अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)। निचार खंड में ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा एक वर्ष बाद भी प्रभावितों को नहीं मिल पाया है। बीते वर्ष निचार खंड में दो सौ मीट्रिक टन नकदी फसल सेब पूरी तरह से खराब हो गई थी और 3600 मीट्रिक टन सेब को क्षति पहुंची थी। विभिन्न विभागों की टीम ने क्षेत्र में 21 करोड़ 60 लाख रुपये के नुकसान का आंकलन किया था।
गौरतलब है कि बीते वर्ष 18 से 31 मई के बीच हुई ओलावृष्टि से निचार खंड के हजारों बागवानों की सेब और फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। ओलावृष्टि से निचार खंड की निचार पंचायत, अपर सुंगरा, पानवी, नाथपा, कंडार, चगांव, रामनी, जानी, भावावैली के कटगांव, यांगपा और काफनू में सेब की फसल को क्षति पहुंची थी। एक वर्ष से निचार खंड के करीब 4812 किसान-बागवान मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।
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इस संबंध मेें प्रभावित दौलतराम, कमला पायलैस, वीरेंद्र नेगी, रिजंलाल नेगी, राकेश नेगी, संजीव नेगी, दुर्गा दास नेगी, उदेव मेहता, यशपाल राठौर, सुभाष नेगी, रणजीत नेगी, दौलत नेगी, कमल नेगी, जनक नेगी, आनंद नेगी, सुरेंद्र नेगी, तरूण नेगी, शिशुपाल नेगी, टुलु सिंह नेगी और धर्मपाल नेगी सहित अन्य बागवानों ने राहत राशि जारी करने का आग्रह किया है।
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उद्यान विभाग किन्नौर के उप निदेशक डॉ. हेमचंद शर्मा के अनुसार नुकसान का आंकलन कर उपायुक्त, निदेशालय और संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द मुआवजा राशि जारी की जाएगी। वहीं एसडीएम भावानगर धनश्याम दास शर्मा के अनुसार सरकार की ओर से मुआवजे की 31 लाख रुपये की राशि पहुंच चुकी है। सरकार का रेट सेब के फसलों का बहुत कम है। अभी तक केवल 64 प्रभावितों को ही मुआवजा राशि दी गई है।
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