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सिविल अस्पताल रोहडू में डाक्टरों के 16 पद खाली

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फिर ज्वाइनिंग से पहले डॉक्टर के तबादला आदेश रद्द
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सिविल अस्पताल रोहड़ू में डॉक्टरों के 16 पद पड़े हैं खाली
रोहड़ू अस्पताल में रोजाना रहती है पांच से छह सौ ओपीडी
विधायक ने कहा, रोहड़ू के साथ भेदभाव कर रही है सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। सिविल अस्पताल रोहड़ू में बीते कई सालों से डॉक्टरों के 16 पद खाली पड़े हैं। यहां पर ट्रांसफर होने वाले डॉक्टर ज्वाइनिंग देने से पहले ही अपनी एडजेस्टमेंट करवा लेते हैं, इससे स्थानीय लोगों में खासा रोष है। वहीं स्थानीय विधायक ने सरकार पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया है। रोहड़ू अस्पताल में रोजाना पांच से छह सौ ओपीडी रहती है। यहां करीब डेढ़ सौ मरीज इंडोर में दाखिल रहते हैं।
हाल ही में रोहड़ू के लिए दो डॉक्टरों का तबादला हुआ है। दस दिन के भीतर ही सरकार ने एक डॉक्टर के तबादला आदेश रद्द कर दिए हैं। ऐेसे मेें डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। सिविल अस्पताल रोहड़ू में डॉक्टरों के तीस पद मंजूर हैं। वर्तमान में 16 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। एक महिला रोग विशेषज्ञ ने कुछ दिन पहले ही इस्तीफा दिया है। अब अस्पताल में अधिकांश पद विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पड़े हैं। रोहड़ू अस्पताल में हर दिन पांच से छह सौ ओपीडी होती है। यहां करीब डेढ़ सौ मरीज इंडोर में भर्ती रहते हैं।
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जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से रोहड़ू अस्पताल के लिए एक जून को दो विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादले किए थे। वहीं कुछ महीने पहले भी दो डॉक्टरों ने रोहड़ू अस्पताल में ज्वाइनिंग से पहले अपने तबादले रूकवा लिए थे।
सिविल अस्पताल रोहड़ू के एमएस डॉ केशव शर्मा ने बताया कि यहां के लिए दो डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है। हालांकि एक के तबादला आदेश रद होने की सूचना मिली है। रोहड़ू अस्पताल में डॉक्टरों के 16 पद खाली चल रहे हैं।
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रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने कहा कि भाजपा सरकार रोहड़ू के साथ भेदभाव कर रही है। अस्पताल में मरीजों के साथ राजनीति हो रही है। एक दर्जन से अधिक डॉक्टरों के पद केवल रोहड़ू अस्पताल में खाली पड़े हैं। ज्वाइनिंग से पहले ही तबादला आदेश रद्द हो रहे हैं।
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