रोहडू। खड़ापत्थर से छह किलोमीटर दूर घने जंगल के बीच ऐतिहासिक धार्मिक पर्यटन स्थल गिरिगंगा सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। गर्मी के दिनों में यहां पर प्रदेश के बाहर से भी श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंच रहे हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए छोटे वाहनों के लिए बनी सड़क खस्ताहाल है। मंदिर में निर्माणाधीन सराय भवन का कार्य अठारह साल पहले शुरू हुआ था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।
ऊपरी शिमला के लोग गिरिगंगा को धार्मिक स्थल मानते हैं। लोग मुंडन संस्कार, अस्थियां प्रवाह तक के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। धार्मिक पर्व पर चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, रोहडू से लोग यहां पर पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं।
गिरिगंगा तक पहुंचाने वाली सड़क को पक्का करना तो दूर इसके गड्ढे तक नहीं भरे जा रहे। बारिश के मौसम में लोगों को छह किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। करीब अठारह साल पहले विधायक नरेंद्र बरागटा ने सराय का शिलान्यास किया था। यहां के लिए पर्यटन सर्किट के तहत पार्किंग व सराय के लिए दोबारा धन की व्यवस्था की गई।
2012 में कांग्रेस की सरकार बनी तो यहां पर खर्च हुए धन की जांच बैठाई गई। पांच साल में न सराय बनी न रास्ते ठीक हुए। जांच लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन एसडीओ जुब्बल ने की थी।
डेढ़ साल पहले दोबारा नरेंद्र बरागटा ने जुब्बल कोटखाई से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अधिकारियों को गिरिगंगा के उत्थान के लिए दिशा निर्देश दिए थे।
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ पीपी शर्मा ने बताया कि सड़क को जंगल के बीच चौड़ा नहीं किया जा सकता। इसके रखरखाव के लिए शीघ्र बजट उपलब्ध होने वाला है। सड़क पर पड़े गड्ढों को विभाग ने ठीक करना शुरू कर दिया है।