सरकार और शिक्षा विभाग की अनदेखी विद्यार्थियों पर पड़ रही भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिले किन्नौर में शिक्षा के दावों की पोल खुल रही है। जिले के कई स्कूल बिना मुखिया के ही चल रहे हैं। शिक्षकों के भी सैकड़ों पद रिक्त हैं। ऐसे में जिले के विद्यार्थियों को कैसे गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं।
जिले में प्रधानाचार्य, हेडमास्टर और जेबीटी शिक्षकों के करीब 130 पद वर्षों से रिक्त हैं। किन्नौर में कुल 32 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं हैं। इनमें से 16 पद कई वर्षों से खाली पड़े हैं। इसी तरह जिले के 20 माध्यमिक स्कूलों में से 12 में ही हेडमास्टर सेवाएं दे रहे हैं। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रूपी, छोटा कंबा, छितकुल, लिप्पा, चगांव, मीरू, शौंग, चांगो, बारंग, ब्रुआ, ज्ञाबुंग, जंगी, किल्बा, पूह और उरनी में लंबे समय प्रधानाचार्य की तैनाती नहीं हो पाई है। हाई स्कूल बड़ा कंगा, रामनी, पानवी, बरी, नाथपा, कंगोस और चांसू में हेड मास्टर नहीं है। प्रधानाचार्य और हेडमास्टर की तैनाती न होने से इस वर्ष चार स्कूलों की दसवीं कक्षा का वार्षिक परीक्षा परिणाम शून्य आया था। वहीं जिले के स्कूलों में 275 जेबीटी शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 106 पद रिक्त हैं। ऐसे में जिले के विद्यार्थियों को शिक्षकों की कमी के कारण परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। शिक्षक न होने से विद्यार्थियों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा, अभिभावक इसको लेकर खासे चिंतित हैं।
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलदीप नेगी ने कहा कि शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने के बारे में समय-समय पर सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही जिले के स्कूलों में प्रधानाचार्य, हेडमास्टर और शिक्षकों की तैनाती होगी।