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शिमला और कुल्लू जिले में सेब के बगीचों में चली आरी बनेगा चुनावी मुद्दा

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चुनावी मुद्दा..
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सेब के हजारों पेड़ों का हिसाब मांगेंगे बागवान
विस चुनाव में शिमला और कुल्लू में अवैध कब्जे हटाने का मामला गरमा रहा
विपिन काला
रामपुर बुशहर।
शिमला और कुल्लू जिले में सेब के बगीचों में चली आरी विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन रही है। जिला शिमला के सेब उत्पादक इलाकों और कुल्लू के आउटर सिराज में वन भूमि पर अवैध हटाने के लिए सेब के हजारों पेड़ों पर आरी चलाई गई है। अवैध कब्जों को हटाने के लिए वन विभाग ने सिर्फ छोटी काश्त वाले बागवानों को निशाना बनाया। करीब दो साल से वन भूमि को खाली करवाने के लिए सेब के पेड़ों पर आरी चलाई गई। हालांकि अब वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने का काम थमा हुआ है।
वन भूमि पर अवैध कब्जा किए बागवानों के बगीचों में दो साल से लेकर 35-40 साल के पेड़ों को काटा गया है। हालांकि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद वन भूमि, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमों ने बगीचों से अवैध कब्जे हटाने का बीड़ा उठाया था। सेब के बगीचों से पेड़ काटकर अवैध कब्जे हटाने को लेकर ज्यादा नाराजगी छोटे और गरीब बागवानों में है। इन बागवानों का दर्द यही है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए गरीब और छोटे बागवानों को निशाना बनाया गया, जबकि बड़े बागवानों पर हाथ नहीं डाला गया। माना जा रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव में बागवान सेब के पेड़ों के काटने की नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। अवैध कब्जे हटाने का विरोध भले की कांग्रेस और भाजपा नेता मुखर होकर न कर सके पर इसका असर विस चुनाव में पड़ेगा। इस डर से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता थोड़ा भयभीत जरूर हैं। हालांकि भाजपा और कांग्रेस नेता अवैध कटान को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधते रहे हैं। कांग्रेस नेता कहते हैं कि भाजपा ने अवैध कब्जे रेगुलर करने को आवेदन मांगे थे, उनको आधार बनाकर वन विभाग ने अवैध कब्जे हटाए हैं। भाजपा नेता कहते हैं कि सत्ता में कांग्रेस सरकार रही है और यह अवैध कब्जे सरकार ने हटाए हैं। वन भूमि पर अवैध कब्जे हटाने से छोटे और गरीब बागवानों पर पड़ी मार सेब के हजारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली। इससे कई बागवान उजड़े हैं। इतना ही नहीं उनकी रोजी रोटी भी छिनी है।
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इन क्षेत्रों में चली आरी
जिला शिमला के जुब्बल, कोटखाई, रोहड़ू, चौपाल, नेरवा, ठियोग, नारकंडा, कुमारसैन, कोटगढ़, ननखड़ी, रामपुर, सराहन, नारायण बाहली, गौरा, मशनू, 15-20 क्षेत्र, कुल्लू जिले के आउटर सिराज के आनी, दुराह, दलाश, नित्थर, अरसू, बागीपुल आदि दर्जनों गांवों में सेब के छोटे और बड़े पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई गई। इससे इन क्षेत्रों के बागवानों खासकर लघु और गरीब किसानों में खासी नाराजगी है।


इतनी हेक्टेयर भूमि से छुड़ाए कब्जे
कुल्लू के आउटर सिराज क्षेत्र के आनी वन वृत्त में 18 हजार 102 सेब के पेड़ों पर आरी चलाई गई है। आनी उपमंडल के निरमंड विकास खंड में 26 और आनी विकास खंड की 28 पंचायतें हैं। आनी उपमंडल में करीब 88 हेक्टेयर वन भूमि से अवैध कब्जे हटाए गए। रामपुर उपमंडल में 3487 सेब के पेेड़ों पर आरी चली और 27.10 हेक्टेयर वन भूमि से अवैध कब्जा हटाया। रोहड़ू क्षेत्र में 1400 अवैध कब्जे के मामले सामने आए थे और वन विभाग ने 800 अवैध कब्जे खाली करवाए थे।

वन अधिकार अधिनियम लागू नहीं : द्रैक
भाजपा नेता प्रेम सिंह द्रैक कहते हैं कि कांग्रेस सरकार ने वन अधिकार अधिनियम लागू नहीं किया। प्रदेश भर में करीब एक लाख 67 हजार 339 लोगों ने अवैध कब्जे नियमित करने के लिए आवेदन किया था, जबकि ऐसे करीब दो लाख मामले थे। सरकार ने समय रहते वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे दिए होते तो उनको बेदखल नहीं होना पड़ता।
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शपथपत्र देने वालों के हटे कब्जे : कृष्ण
ब्लॉक कांग्रेस रामपुर के मीडिया प्रभारी कृष्ण गोपाल कहते हैं कि पूर्व धूमल सरकार ने शिमला, कुल्लू, मंडी, किन्नौर के लोगों से शपथ पत्र लिए। साथ ही कहा कि जिन लोगों ने वर्ष 2000 तक अवैध कब्जे किए हैं, उनकी भूमि नियमित कर दी जाएगी। इसके बाद जिन लोगों ने कब्जे नियमित करने के लिए शपथ पत्र दिए थे, उनकी अवैध कब्जे हटाए गए।
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