प्रदेश में बिल्डरों को अपने हर प्रोजेक्ट में 25 फीसदी फ्लैट या प्लॉट हिमाचलियों को देने होंगे। अब कानून में ही इसका प्रावधान कर दिया गया है।
रियल इस्टेट के नए टीसीपी एक्ट में हिमाचलियों के लिए 25 फीसदी कोटा तय कर दिया है।
प्रदेश के लोगों के हितों के मद्देनजर सरकार ने विधेयक में यह संशोधन किया है। इस संशोधन के साथ विधानसभा में शुक्रवार को नया टीसीपी विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया।
राज्यपाल की मंजूरी के साथ ये कानून बन जाएगा। इसी के साथ 2005 का अपार्टमेंट एक्ट भी निरस्त हो गया है।
यदि प्रमोटर गैर हिमाचली है तो उसे प्रोजेक्ट के लिए धारा 118 की अनुमति इसी के आधार पर मिलेगी। इसके बाद यदि वह गैर हिमाचलियों को प्लॉट या फ्लैट बेचता है तो खरीदार को भी धारा 118 के तहत मंजूरी लेनी होगी।
विधेयक को पारित करने से पहले शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि अपार्टमेंट एक्ट पर बनी विधानसभा की समिति ने कुल 13 सिफारिशें की थीं।
ये सभी नए कानून में मान ली गई हैं। टीसीपी की कार्यशैली सुधारने के लिए 25 पद भरने को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है।
रियल इस्टेट के लिए स्ट्रक्चरल डिजाइन और मृदा टेस्टिंग की व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार की गई है।
उन्होंने कहा कि नया कानून रियल इस्टेट सेक्टर और राज्य की जरूरतों को पूरा करेगा। इसमें आए अन्य सुझावों को नियम और बाइलॉज बनाती बार जोड़ा जाएगा।
छोटे प्लॉट्स को मंजूरी दें
शिमला। विधेयक पर विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि प्लानिंग एरिया में 4 बिस्वा से छोटे प्लाट्स पर भी निर्माण की मंजूरी सरकार दे।
विधायक अनिरुद्ध सिंह ने भी छोटे प्लाट्स पर निर्माण को मंजूरी देने पर जोर दिया। सुरेश भारद्वाज ने मांग की कि शिमला में अपार्टमेंट एक्ट ताक पर रखकर हुए निर्माण पर पेनल्टी लगाकर भवनों को नियमित किया जाए।