शिमला की नाहन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे इंग्लैंड के एडवर्ड और
स्विटजरलैंड के मार्क अब जेल से ही अपने परिजनों से आमने-सामने बात कर
सकेंगे। इसके लिए उनके अपनों को लंबी यात्रा कर नाहन आने की जरूरत नहीं
होगी।
प्रदेश का जेल विभाग कैदियों को अपनों से बात करने के लिए इंटरनेट की सुविधा दे रहा है। इससे वे स्काइप जैसे माध्यमों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात कर सकेंगे।
वेबकाम के माध्यम से परिजनों से बात करने के साथ-साथ उनका चेहरा भी देख पाएंगे। यह सुविधा कैदियों को एक सप्ताह के भीतर मिलेगी। इसके लिए जेल विभाग अपनी वेबसाइट तैयार कर रहा है।
राज्य की जेलों में नाइजीरिया, स्विटजरलैंड, जापान, इंग्लैंड, तिब्बत और टर्की के अलावा देश के विभिन्न जगहों के 1886 कैदी सजा काट रहे हैं। इनमें 86 महिलाएं भी शामिल हैं। टेलीफोन पर बात करने की सुविधा अधिकतर जेलों में कैदियों को मिल रही है, लेकिन वीडियो कांफ्रेंसिंग की तर्ज पर वेबकाम के माध्यम से सीधे बात करने की सुविधा देने वाला हिमाचल संभवत: पहला राज्य होगा।
प्रारंभिक स्तर पर यह सुविधा नाहन, शिमला, मंडी और बिलासपुर की जेलों में मिलेगी।
ऐसे मिलेगी सुविधा
एक सप्ताह के भीतर जेल विभाग की अपनी वेबसाइट लांच हो रही है। इसके बाद प्रदेश की जेलों में बंद कैदी अपनों से बात कर सकेंगे। जिनके घरों में इंटरनेट सुविधा नहीं है, वे साइबर कैफे या लोकमित्र केंद्रों में जाकर रिक्वेस्ट कर सकते हैं। संबंधित जेल सुपरिंटेंडेंट समय और सुविधा के अनुसार कैदियों के परिजनों को बात करने का समय देने को अधिकृत होंगे।
एक हफ्ते के भीतर जेल विभाग वेबसाइट लांच कर रहा है। कैदियों के परिजन अपनों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात कर पाएंगे। इससे लोगों का समय और पैसा बचेगा और वे अपनों को नजदीक से देख भी पाएंगे।
- एसआर मरडी, एडीजीपी, सीआईडी एवं जेल