पहले चरण में यह व्यवस्था सरकारी कार्यालयों में लागू होगी। इसके बाद औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं को भी प्रीपेड मीटर लगाने का विकल्प दिया जाएगा। यदि यह प्रणाली सफल रहती है तो भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। प्रीपेड मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को बिजली के लिए पहले से रिचार्ज कराना होगा, ठीक उसी तरह जैसे मोबाइल फोन में बैलेंस डलवाया जाता है। जितनी राशि का रिचार्ज होगा, उतनी ही बिजली उपभोग की जा सकेगी। रिचार्ज समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाएगी, जिससे अनावश्यक खपत पर रोक लगेगी और बकाया बिल की समस्या खत्म होगी। बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी ने बताया कि सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड मीटर लगाने के बाद इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा। सकारात्मक अनुभव के आधार पर औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं को भी इस आधुनिक प्रणाली से जोड़ने की योजना है।