बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीटी जिंटा ने शिमला में एक ऐसी कंपनी में निवेश किया है, जो राजस्व विवाद में उलझी है। नालदेहरा गोल्फ कोर्स के पास इस कंपनी का रिजॉर्ट है। कंपनी पर भू सुधार कानून 1972 की धारा 118 के उल्लंघन का केस चल रहा है।
यह केस यदि कंपनी हारती है तो भूमि और उस पर बनी सारी प्रॉपर्टी सरकार में निहित हो जाएगी। कंपनी ने मशोबरा के पास निजी भूमि खरीदी थी, जिस पर रिजॉर्ट बना है।
इस मामले में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर की हैसियत से डीसी शिमला ने कोर्ट प्रोसीडिंग्स शुरू कर दी हैं। केस के दौरान ही मूलत: शिमला के रोहडू की रहने वाली प्रीटी जिंटा अपनी मां के साथ इस कंपनी में डायरेक्टर बन गईं।
वर्तमान में कंपनी में प्रीटी जिंटा को मिलाकर 4 निदेशक हिमाचली हैं। इसी आधार पर प्रीटी ने राज्य सरकार को धारा 118 का केस वापस लेने के लिए लिखा है। तर्क दिया है कि निदेशक अब गैर हिमाचली नहीं हैं, इसलिए धारा 118 के तहत मंजूरी की जरूरत नहीं।
संपर्क करने पर प्रीटी जिंटा की मां नीलप्रभा ने कहा कि वह पिछले कई दिनों से शिमला से बाहर हैं, इसलिए कोर्ट प्रोसीडिंग्स में क्या हुआ? इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
पहले कौन ले फैसला?
प्रधान सचिव राजस्व तरुण श्रीधर ने कहा कि कंपनी की ऑनरशिप में हुए बदलाव के बाद धारा 118 से छूट देने का आवेदन आया था, लेकिन चूंकि डीसी के यहां कोर्ट प्रोसीडिंग्स चल रही हैं, इसलिए इस स्टेज पर प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हो सकता। पहले डीसी को फैसला लेना होगा।
दूसरी ओर डीसी शिमला दिनेश मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी में निदेशक बेशक हिमाचली हों, लेकिन कंपनी की अलग पहचान होने के कारण धारा 118 में मंजूरी जरूरी है। इन तथ्यों के साथ केस सरकार को भेजा है। फैसले का इंतजार है। कोर्ट प्रोसीडिंग्स अलग से चल रही हैं।