सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए प्री-मेच्योर रिटायरमेंट के नियम बदल दिए हैं। पूरी पेंशन के लिए अब कम से कम 20 की सेवा और कम से कम 45 साल उम्र की शर्त लागू होगी। इनमें से जो भी पहले आएगा, उस आधार पर कर्मचारी समय पूर्व सेवानिवृत्ति ले सकेंगे। राज्य के सभी 1.91 लाख कर्मचारी एवं अधिकारी इसके दायरे में आएंगे। यह व्यवस्था वीआरएस के लिए नहीं होगी।
कार्मिक विभाग पूर्व सरकार के दौरान लिए फैसलों को समीक्षा के लिए कैबिनेट में ले गया था। कैबिनेट ने सिविल सर्विसिज प्री-मेच्योर रिटायरमेंट रूल्स 1976 की धारा 3 की उपधारा 2 में 16 मार्च 2012 को हुआ संशोधन रद कर दिया। संशोधन के तहत 20 के सेवाकाल की शर्त को रखते हुए 45 साल उम्र होने की शर्त को हटा दिया गया था। इसी अनुसार वित्त विभाग ने भी नियमों में छूट देते हुए 20 साल सेवाकाल की अवधि के प्रावधान को रिलेक्स कर दिया था।
जारी निर्देशों में कहा गया था कि 20 साल से कम सेवाकाल पर पेंशन की गणना प्रो-रेटा आधार पर होगी। लेकिन अब सरकार ने रूल्स में किए गए इस संशोधन को खारिज करते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी है। प्रधान सचिव कार्मिक एसकेबीएस नेगी ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
कर्मचारी-पेंशनर कल्याण बोर्ड निरस्त
शिमला। राज्य सरकार ने धूमल सरकार के दौरान बनाए गए कर्मचारी एवं पेंशनर कल्याण बोर्ड को भी एबोलिश कर दिया है। पूर्व सरकार ने चुनाव घोषणा पत्र के अनुसार बोर्ड तो बनाया था, लेकिन इसमें केवल एक कर्मचारी नेता को एडजस्ट करने के अलावा कुछ नहीं हुआ। इस बोर्ड की तरह की कोई संस्था अब राज्य सरकार नहीं बनाएगी।