कई परियोजनाओं में 20 फीसदी तक गिरावट
कई परियोजनाओं में पानी की उपलब्धता घटने से उत्पादन में 20 फीसदी तक गिरावट हुई है। बारिश की कमी से नदियों और जलाशयों में पानी का प्रवाह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। इसका असर छोटी-बड़ी सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है। बरसात के बाद जिस समय हिमाचल में बिजली उत्पादन बढ़ जाता है, इस बार उसी अवधि में उत्पादन कम रहने से संकट खड़ा हो गया है। बोर्ड को महंगी दरों पर बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है, लेकिन बाजार में पर्याप्त उपलब्धता नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बिजली की मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने से ओपन मार्केट में भी दबाव बना हुआ है।
देशभर में भी बढ़ा बिजली संकट का दबाव
देश के कई हिस्सों में भी बिजली की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। सितंबर में देश में बिजली की कमी तीन साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बिजली क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में बिजली की कमी करीब 560 मिलियन यूनिट रही, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक है। कम बारिश के कारण जल विद्युत उत्पादन में गिरावट और दिन में बनने वाली अक्षय ऊर्जा को संग्रहित करने के लिए पर्याप्त बैटरी भंडारण व्यवस्था नहीं होने से ताप विद्युत पर निर्भरता बढ़ी है। सितंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर करीब 13.3 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। देश में औद्योगिक गतिविधियों और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण बिजली की पीक डिमांड में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर हिमाचल जैसे जल विद्युत आधारित राज्यों पर भी पड़ा है।
बिजली सप्लाई सुचारू रखने को प्रयास जारी
हिमाचल ही नहीं पूरे देश में इन दिनों बिजली संकट गहराया हुआ है। कोयले की कमी चल रही है। अल नीनो के कारण पवन ऊर्जा का क्षेत्र भी प्रभावित है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि बिजली की सप्लाई सुचारू रखी जाए। इसके लिए खुले बाजार से खरीद हो रही है। कई राज्यों के साथ समझौते भी किए जा रहे हैं।- आरडी नजीम, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा हिमाचल प्रदेश सरकार