हिमाचल सरकार ने 01 जुलाई 2013 से राज्य में पॉलीथिन में पैक खाद्य पदार्थों और अन्य सामान की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए इस बारे में मुख्य सचिव ने अधिसूचना जारी कर दी है। यह रोक हिमाचल प्रदेश नान-बायोडिग्रेडेबल गारबेज कंट्रोल एक्ट 1995 की धारा 3-ए के तहत लगाई गई है।
कारोबारियों को अब पुराना स्टॉक हटाना होगा। इसे खपाने का समय नहीं मिलेगा।
राज्य के कारोबारी यानी ट्रेडर, रिटेलर और वेंडर्स 25 तरह के खाद्य पदार्थों को न स्टोर में रख सकेंगे, न सप्लाई करेंगे और न ही बेच सकेंगे। दूध, दही और ब्रेड को इस रोक से बाहर रखा है।
इसके अलावा पॉलीथिन में पैक या लिपटी हुई मैग्जीन, किताबों, रेडीमेड कपड़ों, सूटकेस, हैंड बैग्स, यूटेंसिल्स, गिफ्ट आइट्म्स, चटाइयों और अन्य सामान की बिक्री भी नहीं हो सकेगी। यह संबंधित कारोबारी की जिम्मेदारी होगी कि वह इस तरह के उत्पाद या तो न बेचे या पॉलीथिन हटाकर बेचे।
हिमाचल हाईकोर्ट ने पर्यावरण विभाग से संबंधित एक केस में इस तरह का प्रतिबंध लगाने के आदेश 10 जनवरी 2013 को दिए थे।
ये हैं 25 प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ
राज्य सरकार ने कुल 25 खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई है। इसमें चिप्स/वेफर्स, कुरकुरे/मैड एंगल, बिस्कुट, नमकीन, लॉलीपोप/कैंडी/टाफी/च्विंगम, चीज पफ, कुकीज, मैगी/नूडल्स, आम पापड़, आइसक्रीम, चाकलेट, कोर्नफ्लेक्स, डीप फ्राइड समोसा, पकोड़ा, पिज्जा, बर्गर, पैटीज, फ्रेंच फ्राइज, कारबोनेटिड ड्रिंक्स, शेक, सिंथेटिक एवं फ्राइड ब्रीवरेज, इंडियन स्वीट्स, नान/पाव भाजी, गोल गप्पा, क्रीमी/फ्रूट केक्स शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने छह माह पहले प्रतिबंध के आदेश दिए थे। उद्योग विभाग और कुछ कारोबारी संघों ने अदालत में अपना पक्ष रखा, लेकिन माकूल राहत न मिलने के बाद अब यह रोक प्रभावी हुई है।-सुदृप्त राय, मुख्य सचिव एवं प्रभारी सचिव पर्यावरण विभाग।