भ्रष्टाचार के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की परेशानी एक बार फिर बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हाइडल पावर प्रोजेक्ट में मैसर्स वेंचर एनर्जी टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की तरफदारी करने में भ्रष्टाचार के नए तथ्य आने का खुलासा करते हुए उनके खिलाफ सीबीआई जांच करने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका पर 15 जनवरी को सुनवाई होगी।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने खंडपीठ के समक्ष नया आवेदन दायर कर बताया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के नए तथ्य सामने आए हैं, इसलिए जल्द सुनवाई कर सीबीआई को जांच करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि हाइडल पावर प्रोजेक्ट का ठेका 14 जून 2002 को मैसर्स वेंचर एनर्जी टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड़ को दिया गया था।
कंपनी इसे पूरा करने में असफल रही और उसे कई बार समय दिया गया। वीरभद्र सिंह ने मुख्यमंत्री बनते ही इस कंपनी को काम करने के लिए 10 माह का समय और दे दिया। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने 17 अक्तूबर 2012 को चुनाव में शपथपत्र में नहीं बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने कंपनी से कर्ज लिया है।
वहीं उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने लोकसभा के उपचुनाव में 30 मई 2013 को बताया कि कंपनी से दोनों ने कुल 3 करोड़ 90 लाख रुपये का ऋण लिया है। इसी कारण मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने कंपनी को फायदा पहुंचाया। इसी तरह उक्त कंपनी के निदेशक चंद्रशेखर ने पांच करोड़ रुपये का ऋण मुख्यमंत्री के बेटे विक्रमादित्य व बेटी अपराजिता कुमारी की कंपनी को दिया।
कंपनी के ऑडिट से पता चला कि यह ऋण बिना ब्याज के दिया गया और ऋण वापस कब किया जाएगा इसकी अवधि भी तय नहीं की गई। भूषण का आरोप है कि वीरभद्र मनी लॉंड्रिंग, भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति समेत कई मामलों में शामिल हैं, जिसकी गहन व निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।