राजस्व वृद्धि और व्यय प्रबंधन की ठोस रणनीति जरूरी: अध्ययन
अध्ययन के मुताबिक अनिवार्य देनदारियों में बड़ा बजट जाने से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास कार्यों के लिए वित्तीय गुंजाइश पर दबाव बढ़ रहा है। शोध में वित्तीय दबाव अनुपात 1.35 आंका गया है। यह संकेत देता है कि पेंशन देनदारियां सरकार के कुल व्यय आधार से अधिक रफ्तार से बढ़ रही हैं। ऐसे में दीर्घकाल में वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए राजस्व वृद्धि और व्यय प्रबंधन की ठोस रणनीति जरूरी होगी। हालांकि इन क्षेत्रों पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए अलग से बजटीय आंकड़ों का विश्लेषण आवश्यक होगा।
अर्थव्यवस्था के मुकाबले देनदारियों का अनुपात बढ़ा
शोध के अनुसार वर्ष 2014-15 में जीएसडीपी के मुकाबले पेंशन व्यय 2.34 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 3.75 प्रतिशत हो गया। इससे स्पष्ट है कि राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में भी पेंशन भुगतान का भार बढ़ा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो भविष्य में सार्वजनिक खर्चों और पेंशन देनदारियों के बीच संतुलन साधना चुनौतीपूर्ण होगा। शोध में हिमाचल प्रदेश सरकार के बजट दस्तावेजों, वित्त लेखों और आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों सहित विभिन्न स्रोतों का संदर्भ लिया गया है।
वित्तीय संकेतक 2014-15 2024-25
राजस्व व्यय में पेंशन की हिस्सेदारी 14.73% 21.36%
जीएसडीपी के मुकाबले पेंशन व्यय 2.34% 3.75%
पेंशन व्यय की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर — 12.75%
राजस्व व्यय की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर — 9.43%
जीएसडीपी की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर — 7.90%
वित्तीय दबाव अनुपात — 1.35
पेंशन फंड का गठन जरूरी : डॉ. श्रीकांत बाल्दी
प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं पूर्व वित्त सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि व्यवस्था ओपीएस की हो, यूपीएस की या एनपीएस की, राज्य में पेंशन फंड का गठन अनिवार्य है। ओपीएस गैर-अंशदायी (नॉन-कंट्रीब्यूटरी) है, जबकि यूपीएस और एनपीएस अंशदायी हैं। ओपीएस के कारण वित्तीय बोझ आना तय है। इसका समाधान यही है कि या तो वर्तमान पीढ़ी से अंशदान लिया जाए या भविष्य की पीढ़ी पर भार डाला जाए। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि यदि पेंशन कंट्रीब्यूटरी होगी तो भविष्य के लिए वित्तीय बोझ कम होगा।