लाखों रुपये लंबित, चार हजार से कैसे मनेगी दिवाली : पुंडीर
वहीं प्रदेश में कर्मचारियों के लाखों रुपये के वित्तीय लाभ लंबित होने पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब कर्मचारियों के लाखों रुपये बकाया हैं, तो महज चार हजार रुपये की राहत से उनकी दिवाली कैसे मनेगी। उन्होंने सरकार से दिवाली से पहले महंगाई भत्ते और छठे वेतन आयोग के एरियर के भुगतान की घोषणा करने की मांग की। डॉ. पुंडीर ने कहा कि प्रदेश में ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनके वित्तीय लाभों की बकाया राशि 15 लाख रुपये से अधिक है। इसके बावजूद लंबित भुगतान जारी करने के बजाय कुछ हजार रुपये की राहत देकर त्योहार मनाने की बात कही जा रही है। सरकार को कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों को समझते हुए उनके हक का पैसा जारी करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों की स्थिति पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कर्मचारी सोच रहे हैं कि मिठाई खाएं, बांटें या पटाखे चलाएं, जबकि उनके अपने लाखों रुपये सरकार के पास बकाया हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए त्योहार की खुशियों से अधिक चिंता अपने लंबित वित्तीय लाभों को लेकर है। सरकार को राहत की घोषणाओं के साथ बकाया भुगतान पर भी गंभीरता दिखानी चाहिए।
एचआरटीसी पेंशनरों के 700 करोड़ बकाया, शिमला में धरने की तैयारी
एचआरटीसी के 9,000 से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की करीब 700 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारियां अटकने से पेंशनरों में आक्रोश है। पेंशनरों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को 31 अक्तूबर तक मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही चेताया है कि यदि समाधान न हुआ तो 3 नवंबर से प्रदेशभर के पेंशनर परिवारों सहित शिमला के पुराने बस अड्डे पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।
वर्ष 2024 के बाद सेवानिवृत्त हुए करीब 700 कर्मियों के लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और कम्यूटेशन के 25 से 30 लाख रुपये बकाया हैं। वहीं, जुलाई 2026 के बाद सेवानिवृत्त हुए कुछ कर्मचारियों की पेंशन तक शुरू नहीं हो पाई है। इसके अलावा नए वेतनमान के तहत मिलने वाले वेतन और पेंशन एरियर का भुगतान भी अटका हुआ है। पेंशनरों का कहना है कि मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और निगम प्रबंधन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिले हैं। इससे बुढ़ापे में दवाइयों के खर्च और परिवार चलाने में संकट हो गया है।
पेंशनरों की प्रमुख मांगें
एचआरटीसी पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के समन्वयक राजेंद्र ठाकुर, मीडिया प्रभारी बृज लाल ठाकुर, सह मीडिया प्रभारी देवेंद्र चौहान सहित पदाधिकारी केसी चौहान, देव राज ठाकुर, अजमेर ठाकुर और रूप चंद ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी कर्मियों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अन्य विभागों के कर्मचारियों को 50-50 हजार रुपये की एरियर किस्त मिल चुकी है, लेकिन निगम के पेंशनरों को एक किस्त तक जारी नहीं की गई। 31 अक्तूबर तक फैसला न होने की सूरत में सड़कों पर उतरना मजबूरी बन चुका है।
सरकार द्वारा घोषित 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) की किस्त जारी की जाए।
एरियर की 50-50 हजार रुपये की किस्त का तत्काल भुगतान हो।
जुलाई 2025 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों की रोकी गई पेंशन बहाल की जाए।
31 मार्च 2026 के बाद से लंबित पड़े सभी चिकित्सा बिलों का भुगतान किया जाए।
वर्ष 2024 के बाद सेवानिवृत्त कर्मियों को ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट व कम्यूटेशन की राशि मिले।
अन्य विभागों की तर्ज पर सभी लाभ दिए जाएं और कुल 8 प्रतिशत बकाया डीए का भुगतान हो।