सरकार और राज्य आयोग के बीच चल रही खींचतान के चलते कैबिनेट ने पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन का फैसला लिया है। अब पंचायतों की नई सीमाएं तय होंगी। इस स्थिति में मौजूदा मतदाता सूची अप्रासंगिक हो जाएगी और राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसे पंचायत क्षेत्र में मतदाताओं का नया ब्योरा तैयार करना पड़ेगा। इससे न केवल प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों में देरी होगी, बल्कि जनवरी 2026 में प्रस्तावित पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी आगे खिसक सकते हैं। पंचायतों में दोबारा से वोटर लिस्ट के लिए मैपिंग होगी और फाइनल वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया को पूरी करने में राज्य निर्वाचन आयोग को समय लग सकता है।