हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल के जंगलों की रखवाली का बीड़ा महिला मंडलों ने उठाने का फैसला लिया है।
महिला मंडलों ने निर्णय लिया है कि अगर जंगलों में कोई कुल्हाड़ी चलता हुआ पाया गया, तो उसका हुक्का पानी भी बंद किया जा सकता है।
शीत मरुस्थल में पिछले डेढ़-दो दशक से घाटी के कुछ हिस्सों में अवैध लकड़ी की तस्करी जोरशोर से हो रही थी। इसी के चलते अब महिलाएं जंगलों के संरक्षण के लिए आगे आई हैं।
क्षेत्रफल के लिहाज से लाहौल-स्पीति प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, लेकिन यहां जंगलों का दायरा क्षेत्रफल के हिसाब से एक प्रतिशत से भी कम है। लाहौल घाटी की तिंदी रेंज में ही जंगल हैं।
अब महिला मंडलों के जागरूकता अभियान से हरे-भरे पेड़ों को काफी हद तक बचाया जा सकेगा। जसरथ महिला मंडल प्रधान प्रेम दासी तथा नालडा महिला प्रधान शिवी देवी ने कहा कि लाहौल में हरे-भरे पेड़ों के जंगल नाममात्र हैं।
यदि जंगलों का अवैध कटान यूं ही होता रहा तो निकट भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। लिहाजा, उन्होंने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लाहौल के महिला मंडलों ने जंगलों के अवैध कटान पर ध्यान केंद्रित किया है।
उन्होंने कहा कि अवैध कटान करने पर पकड़े जाने पर आरोपियों का हुक्का-पानी भी बंद किया जा सकता है। घाटी के कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां महिलाओं ने शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। शराब पीते पकड़े जाने पर हुक्का पानी बंद करने की प्रथा है।
लाहौल वन मंडल अधिकारी एचएल राणा ने भी माना कि वन काटुओं पर लाहौल के महिला मंडलों का भी वन विभाग को पूरा सहयोग है। लाहौल दौरे के दौरान वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने भी लाहौल के महिला मंडलों को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई दी है।