प्रदेश की जेलों में ई-पेशी की व्यवस्था 2019 में शुरू हो चुकी है, लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ रिमांड की अवधि बढ़ाने के लिए ही इसका इस्तेमाल हो रहा है। अन्य पेशियों के लिए कैदियों को बटालियन अथवा गार्द के साथ ही कोर्ट भेजा जाता है। इसका खर्चा कारागार विभाग उठाता है। केंद्रीय आदर्श कारागार कंडा में बटालियन की एक छोटी टुकड़ी विशेष तौर पर कैदियों को लाने ले जाने के लिए तैनात है। अन्य जेलों में इसके लिए पुलिस लाइन से गार्द मांगी जाती है। कारागार विभाग सालाना लाखों रुपये कैदियों को पेशी के लिए लाने ले जाने पर खर्च कर रहा है। नई व्यवस्था लागू होने से यह पैसा बचेगा और इसका प्रयोग कैदियों के कल्याण की अन्य योजनाओं पर खर्च किया जा सकेगा। नई प्रणाली से कैदियों को जेल परिसर से ही वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया जाएगा। प्रदेश की सभी 14 जेलों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
गुजरात की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की योजना
गुजरात की जेलों में 45 फीसदी कैदियों की पेशी वर्चुअल माध्यम से हो रही है। हिमाचल की जेलों में भी सभी तरह की पेशियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू करने का प्रस्ताव है। न्यायालय और सरकार की मंजूरी के बाद तुरंत यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे विभाग के समय और धन की बचत होगी।- अभिषेक त्रिवेदी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कारागार विभाग