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Himachal: मंत्री जगत नेगी बोले- कार्यशैली में सुधार नहीं तो अधिकारी होंगे डिमोट

Sat, 14 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

अगर इस दौरान भी लापरवाह अधिकारियों की कार्यशैली में आशातीत सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के लिए चेतावनी दी है। तीन माह बाद बरसात से पहले जिला में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक होगी। अगर इस दौरान भी लापरवाह अधिकारियों की कार्यशैली में आशातीत सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्हें डिमोट कर उनकी एसीआर पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जिला शिकायत निवारण समिति की बैठक में मंत्री ने मंडी कोटली-हमीरपुर राष्ट्रीय उच्च मार्ग का निर्माण धीमा होने पर कंपनी के अधिकारियों को निर्देश गिए। उन्होंने पानी का छिड़काव और मजदूरों की संख्या सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ठाकुर और उपायुक्त अपूर्व देवगन ने भी कंपनी को कार्य तेजी से करने के निर्देश दिए। मंडी जिला कांग्रेस अध्यक्षा चंपा ठाकुर ने कहा कि अधिकारी फोन नहीं उठाते और कई जगह पाइप क्षतिग्रस्त हैं, जिससे घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ठाकुर ने कहा कि आपदा के बाद अधिकारी कार्य करने में असफल हैं। उन्होंने लेटलतीफी और उपमंडल स्तर पर हाउस को गुमराह करने की बात कही।

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जगत नेगी बोले- लोकतंत्र में हो सकते हैं कई फ्रंट, इसमें क्या
प्रदेश में थर्ड फ्रंट की चर्चाओं के बीच राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि लोकतंत्र में कई फ्रंट बनने की संभावना स्वाभाविक है और इसमें असामान्य कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग राजनीतिक मोर्चों का बनना सामान्य प्रक्रिया है। वह शुक्रवार को मंडी में जिला शिकायत निवारण समिति की बैठक के बाद मीडियाकर्मियों के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। आडवाणी और पूर्व राज्यपाल पर विवादित टिप्पणी को लेकर नेगी ने कहा कि माफी भाजपा को मांगनी चाहिए, भाजपा जनता को गुमराह करती रही है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ मामले पर पूर्व राज्यपाल की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया। नेगी ने भाजपा पर राष्ट्रपति के सम्मान को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के समय प्रधानमंत्री बैठे थे और राष्ट्रपति खड़ी थीं और भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि संविधान के अनुसार सर्वोच्च पद कौन सा है।
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