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ऐसे कानून बनाएं, जिन्हें लोग स्वीकार करें : मीरा कुमार

Tue, 22 Oct 2013 01:55 AM IST
अमर उजाला, शिमला
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लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि विधानसभाएं ऐसे कानून बनाएं, जिन्हें लोग स्वीकार भी करें। हमारे देश में आज भी कई कानून हैं, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा।
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दहेज विरोधी कानून के बावजूद दहेज प्रताड़ना होती है। लिंग परीक्षण विरोधी कानून के बावजूद भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। कानूनों पर अमल करवाना भी जनप्रतिनिधियों का काम है।

नेता यदि समाज की सड़ी-गली रूढ़ियों को मिटाने के लिए जनमत तैयार करें, तो यह काम आसान हो जाएगा। मीरा कुमार सोमवार को स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में हिमाचल विधानसभा को संबोधित कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि हमारे गणराज्य के संस्थापकों ने इस राष्ट्र के लिए संसदीय प्रणाली का चयन किया। इस प्रणाली से चुने जाने वाले विधानमंडल आज लोक संस्थाएं बन गए हैं।

यह वह स्थान है, जहां विधायक लोक हित के मसले उठाएं और उन पर चर्चा हो, लेकिन संसद और विधान मंडलों में छोटे-छोटे मुद्दों के लिए व्यवधान डालना चिंता की बात है।

सदन में कोई भी सदस्य नियमों के तहत अपनी बात रख सकता है, इसलिए गतिरोध पैदा करने से बचना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष के अनुसार उन्हें इस बात का दुख है कि संसद के मानसून सत्र में साढे़ 73 घंटे व्यवधानों में नष्ट हो गए। हालांकि, इसी दौरान खाद्य सुरक्षा, भू अधिग्रहण जैसे विधेयक पारित होना संतोष की बात रही।

मीरा कुमार ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायकों के मन में रहना चाहिए कि मतदाताओं ने उन्हें सदन में क्यों भेजा है?

मीरा कुमार ने हिमाचल के नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य की तारीफ करते हुए कहा कि वह बचपन में अपने माता-पिता के साथ हर साल आती थीं।

इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मीरा कुमार का स्वागत किया। इस कार्यक्रम के बाद वह दिल्ली लौट गईं।

लालू की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया जारी
शिमला। मीडिया से बातचीत में मीरा कुमार ने कहा कि कोर्ट की ओर से फैसला सुनाए जाने के बाद राजद नेता लालू प्रसाद यादव की संसद सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया चल रही है।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल विधानसभा में कई ऐतिहासिक फैसले हुए हैं। वह यहां से सीख लेकर जाएंगी। महिला सशक्तिकरण के लिए हिमाचल प्रेरक है।

यहां से पहले महिलाओं को मताधिकार मिला और वर्तमान में पंचायती राज में 50 फीसदी आरक्षण।
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