हिमाचल में राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को इस साल से लागू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत हर पंचायत में एक एमबीए डिग्रीधारक को पंचायत विकास अधिकारी के रूप में नियुक्त करना होगा।
राज्य की पंचायतों को केंद्र सरकार 75:25 की दर से अनुदान देगी। इसमें पंचायतों का कंप्यूटरीकरण, नए पंचायत भवनों का निर्माण और डॉटा एंट्री या अन्य कामकाज के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति का खर्चा भी शामिल होगा।
प्रदेश, जिला और ब्लाक स्तर पर बेहतर काम करने वाली पंचायतों को इंसेंटिव मिलेगा। इस अभियान में 5000 से अधिक आबादी वाली पंचायत को भवन निर्माण के लिए 12 लाख मिलेंगे। रिपेयर के लिए 3 लाख प्रति भवन।
5000 की आबादी वाली हर पंचायत को लेखा-जोखा रखने और डॉटा एंट्री के लिए हर महीने 25 हजार और तकनीकी सहायता के रूप में हर ब्लाक को 30 हजार प्रति माह मिलेंगे।
सभी पंचायतों को ब्राडबैंड से जोड़ने की पहल भी इसी अभियान का एक हिस्सा होगी। हालांकि, हिमाचल में इतनी ज्यादा आबादी की पंचायतें महज 12 से 15 फीसदी हैं। राज्य में कुल 3243 ग्राम पंचायतें हैं।
पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा कहते हैं कि अभियान को लागू करते हुए राज्य सरकार ने तकनीकी असिस्टेंस का बजट रिलीज करने का आग्रह भारत सरकार से किया है।
हालांकि, इस अभियान की कई शर्तें ऐसी हैं, जो हिमाचल के लिहाज से व्यावहारिक नहीं हैं। इसमें बदलाव की जरूरत है। यह मामला केंद्र सरकार से उठाया जा रहा है। इसी चरचा के दौरान पंचायतों में एमबीए की नियुक्ति पर भी फैसला होगा।