लोगों ने उफनती खड्ड पार करने के लिए लकड़ी के तख्तों की अस्थायी पुलिया बनाई है। इससे हरदम हादसे की आशंका है। गानवी, लवाना सदाना, फांचा, जगोरी, क्याओ, कूट छह पंचायतों के लोग इसी पुलिया को पार कर आ-जा रहे हैं। लोगों ने बताया कि पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन ने 17 सितंबर से काम शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन अब तक खड्ड में बड़े-बड़े पत्थर जो पानी के तेज बहाव के साथ बहकर आए थे, वे भी नहीं हटाए। खड्ड का लेबल गांव के बराबर पहुंच गया है। स्थानीय ग्रामीण गोपाल सिंह बंसल ने कहा कि जीवानंद, दौलत राम, गीता राम, जोबन दास, सुरेश और कालू राम की जमीनें बह गईं, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। फूला सिंह कहते हैं कि लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो गए, उन्हें भी कोई मदद आज तक नहीं मिली। सुमित मिल्टू ने बताया कि बिजली परियोजना प्रबंधन ने खड्ड से पत्थर निकालने के लिए मात्र एक जेसीबी लगाई है, जो नाकाफी है।
वहीं, बिजली बोर्ड के गानवी पावर प्रोजेक्ट के एक्सईएन आशुतोष ठाकुर के अनुसार तीन-चार माह पहले लाडा की बैठक में प्रोजेक्ट प्रबंधन ने कहा था कि उनके लिए सड़क का जिम्मा संभालना मुश्किल है। इसलिए पीडब्ल्यूडी इसे अपने पास ले। विभाग के उच्चाधिकारियों से मंजूरी मिल गई है। तहसीलदार को पत्र लिखा है कि पीडब्ल्यूडी को गिफ्ट डीड दी जाए। आशुतोष ने बताया कि खड्ड को पूरी तरह पुराने रास्ते पर लाना है। बस स्टैंड से प्रोजेक्ट की कॉलोनी तक काम करवाएंगे। ट्रेंच बेयर से गानवी तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में खड्ड का तटीकरण करना है। इसके लिए करोड़ों रुपये चाहिए। पुल बनाने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों से बात चल रही है।