भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। ये टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुका है। कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट इससे महंगा हो गया है। अभी तक उन्होंने दवाओं को इस टैरिफ से बाहर रखा गया था।
भारत से गुजरात, कनार्टक, तेलंगाना, महाराष्ट्र व हिमाचल से अमेरिका को दवाएं निर्यात होती हैं। अमेरिका में केवल वहीं कंपनियां अपनी दवा निर्यात कर सकती हैं, जिनके पास यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) का प्रमाणपत्र होता है। अमेरिका के ड्रग विभाग यहां पर पहले दवाइयों की जांच करता है और उसके बाद संबंधित कंपनी को यह प्रमाण पत्र जारी करता है।
हिमाचल से इमाकल्स लाइफ साइंस, एक्मे जेनरिक, मोरपेन, पिनाकल, एल्कम, मेकलियोड्स, ग्लेनमार्क, जेड्स केडला, ओक्सेलिस व पनेशिया समेत एक दर्जन कंपनियां अमेरिका में दवा निर्यात करती हैं।
हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एचडीएमए) के प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि इस फैसले से अमेरिकी बाजार से भारत की दवाएं बाहर हो जाएंगी। उधर,ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि टैरिफ लगने से प्रदेश के दवा उद्योग पर असर पड़ेगा।