मंडी। बल्ह क्षेत्र की महिलाएं अपनी पारंपरिक कलाओं को न केवल संजोए हुए हैं, बल्कि इन्हें एक सफल उद्यम में भी तब्दील कर रही हैं। स्यंव सहायता समूहों के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय को विकसित करने और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने में मदद की है। स्वेटर बुनने से लेकर सीरा और कचालू की बड़ियां बनाने तक ये महिलाएं अपनी मेहनत से नए मानक स्थापित कर रही हैं।
बाला कामेश्वर स्वयं सहायता समूह की सचिव मीना ने बताया कि वे हाथ से बुनी जेंट्स हाफ स्वेटर को 700 रुपये तक और मशीन से बुनी स्वेटर को 500 रुपये में बेच रही हैं। इस व्यवसाय ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी दी है। स्वयं सहायता समूह के गठन के बाद महिलाओं को विभिन्न ऋण योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है, जिससे वे अपनी कक्षाओं को बढ़ा रही हैं। मीना ने बताया कि समूह की सदस्यों को पहले 10 हजार रुपये और फिर 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड प्राप्त हुआ।
सूर्या स्वयं सहायता समूह की प्रधान पूजा वालिया ने बताया कि वे सिर्फ स्वेटर ही नहीं, बल्कि सीरा और कचालू की बड़ियां भी बना रही हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं से तैयार होने वाला स्वादिष्ट सीरा और कचालू की बड़ियां यूं तो अरसे से वे बना रहीं थीं। समूह से जुड़ने के बाद अब इसे व्यवसायिक तौर पर उत्पादित करना शुरू किया है। घरेलू जिम्मेवारियों के साथ-साथ सिलाई का कार्य भी वे कर रही हैं। इसके लिए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिससे दो सिलाई मशीनें खरीदी हैं।
इन दोनों समूहों में सात-सात सदस्य जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) के तहत भी सदस्यों को 40 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष कार्य किया जा रहा है।