नगर निगम मंडी में आयोजित बैठक में मौजूद महापौर वीरेंद्र भट्ट व कमीश्नर रोहित राठौर। संवाद
मंडी। नगर निगम मंडी के जनरल हाउस में पानी के बिल ज्यादा आने पर भी पार्षदों ने खूब हंगामा किया। पार्षदों ने पेयजल बिल को लेकर कई सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि उपभोक्ताओं को तर्कसंगत से कहीं अधिक बिल भेजे जा रहे हैं। इससे शहरवासियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्रेविटी वाटर स्कीम के बावजूद लोगों को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
महापौर वीरेंद्र भट्ट ने माना कि पानी के बिलों में गड़बड़ी को लेकर शहरवासियों की शिकायतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम हाउस इस विषय पर गंभीर है और पानी के टैरिफ में कटौती का प्रस्ताव तैयार कर सरकार के पास भेजा जाएगा। शहर में ग्रेविटी स्कीम होने के बावजूद अधिक बिल आना उचित नहीं है। उपभोक्ताओं के हित में टैरिफ को कम करने की सिफारिश की जाएगी।
नक्शा पास न होने से अटके बिजली-पानी कनेक्शन
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि नगर निगम क्षेत्र में कई मकान मालिक अपनी भूमि पर घर बनाकर रह रहे हैं, लेकिन नक्शा पास नहीं करवाने के कारण उन्हें बिजली और पानी का कनेक्शन लेने में दिक्कतें हो रही हैं। पार्षदों ने वन टाइम सेटलमेंट (एकमुश्त निपटान) की नीति बनाने की मांग की ताकि ऐसे लोगों को राहत मिल सके। महापौर ने बताया कि ऐसे घरों के लिए सरकार से नीति बनाने का अनुरोध किया जाएगा ताकि उन्हें नियमित बिजली-पानी कनेक्शन दिए जा सकें।
डायरिया के मामलों पर सतर्कता, दूषित पानी से खतरा
बैठक में स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। हाल ही में शहर के पड्डल क्षेत्र में डायरिया के मामलों के सामने आने के बाद नगर निगम ने लोगों को अलर्ट जारी किया है। आयुक्त रोहित राठौर ने कहा कि भारी बरसात के कारण बावड़ियों और छूड़ू जैसे प्राकृतिक स्रोतों का पानी दूषित हो रहा है। जलजनित रोगों के खतरे को देखते हुए लोग केवल उबालकर ही पानी पीएं। वीरवार से नगर निगम की क्लोरीन और सफाई टीमों को सभी स्रोतों की जांच और सफाई के लिए भेजा जाएगा।
नगर निगम मंडी में आयोजित बैठक में मौजूद महापौर वीरेंद्र भट्ट व कमीश्नर रोहित राठौर। संवाद