मंडी। आईआईटी मंडी में एनर्जी, हेल्थ और सस्टेनिबिलिटी (स्थिरता) पर एडवांस्ड नैनो मैटीरियल विषय पर ब्रिटिश काउंसिल और रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में यूके और इंडिया के युवा शोधार्थी वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में नैनो तकनीक को एनर्जी, हेल्थ के क्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने पर संयुक्त रिसर्च की जा रही है। कार्यशाला छह अक्तूबर तक चलेगी।
आईआईटी मंडी के एकेडमिक डीन बीडी चौधरी ने कहा कि कार्यशाला में इंडिया के प्रतिष्ठित संस्थानों और यूके के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थी वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में एनर्जी और हेल्थ के क्षेत्र में नैनो तकनीक को लागू करने पर चर्चा की जा रही है। ताकि, नैनो तकनीक से इन क्षेत्रों में स्टीक काम किया जा सके। कार्यशाला में यूके के 17 और इंडिया 16 शोधार्थी मिलकर एनर्जी हेल्थ के क्षेत्र में नैनो तकनीक की संभावनाओं को साझा रिसर्च कर रहे हैं। कार्यशाला में इंडिया की ओर से आईआईटी मंडी के प्रो. प्रदीप परमेश्ववरन और यूके की ओर से नाटिघम यूनिवर्सिटी के डा. ग्राहम न्यूटन समन्वयक का कार्य कर रहे हैं। कार्यशाला में नाटिघम यूनिवर्सिटी के प्रो. नेल चैंपनैस व यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के प्रो. केसी कुमार स्वामी और प्रो. समर के दास विशेषज्ञ की भूमिका अदा कर रहे।
इन संस्थानों के शोधार्थी कर रहे रिसर्च
कार्यशाला में यूके की नाटिघम, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, सेफिल्ड, सेंट इंड्रयू, मैनचेस्टर, हल, लीड्स, बाथ, इंर्पियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद, आईआईटी इंदौर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी भुवनेश्वर, आईआईटी रूड़की, एनआईटी अगरतला, परमार यूनिवर्सिटी ऑफ होल्ट्रीकल्चर, आईआईटी मंडी के युवा शोधार्थी वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।
आईआईटी मंडी को मिले दो नए प्रोजेक्ट
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आईआईटी मंडी को दो नए प्रोजेक्ट मिले हैं। जिसमें आईआईटी मंडी में वेस्ट वाटर को इस्तेमाल योग्य बनाने और सूक्ष्म डायग्नोस डिवाइस बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए आईआईटी प्रबंधन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।