मंडी। चरस बरामदगी के दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने दो आरोपियों को अभियोग साबित न होने पर बरी करने का फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के विशेष न्यायालय (द्वितीय) ने पंजाब के जिला संगरूर की तहसील सुनाम निवासी विजय उर्फ चरण के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 20 के तहत अभियोग साबित न होने पर उसे बरी करने का फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पुलिस ने दल ने 6 मार्च 2007 को शिली-भियाली के पास गश्त के दौरान आरोपी से 350 ग्राम चरस बरामद की थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में अभियोग चलाया। अदालत ने फैसले में कहा कि इस मामले में पुलिस ने तहकीकात के दौरान एनडीपीएस की धारा 52-ए के तहत मैजिस्ट्रेट के सामने सैंपल लेने की कार्रवाई नहीं की है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
इधर एक अन्य मामले में अदालत ने बल्ह तहसील के भ्यारटा (चुनाहण) गांव निवासी बंगाली राम के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 20 के तहत अभियोग साबित न होने के कारण उसे बरी करने का फैसला सुनाया है। मामले के तथ्यों के अनुसार 27 अगस्त 2018 को एसआईयू की टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी ने भ्यारटा (ढाबण) स्थित अपने घर में चरस रखी है। पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली तो वहां से 208 ग्राम चरस बरामद हुई थी। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ चरस बरामदगी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित नहीं कर सका है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। संवाद