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हरी बैहना गांव के 25 परिवारों को बाढ़ का खतरा

Tue, 28 Jun 2016 05:26 PM IST
मंडी
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बाढ़ के हालात - फोटो : अमर उजाला
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सरकाघाट (मंडी)। बरसात शुरू होते ही सरकाघाट उपमंडल के हरी बैहना गांव के 25 परिवारों को फिर बाढ़ का खौफ सताने लगा है। वर्ष 2014 में सीर खड्ड में आई बाढ़ के जख्म आज भी हरे हैं। उस वक्त सीर खड्ड के उफान ने गोपालपुर विकास खंड की बरछवाड़ पंचायत के मुख्यालय डली से लेकर जाहू तक हजारों बीघा जमीन को बहा दिया था। हर साल बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हरी बैहना के लोगों को उठाना पड़ता है।
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   2012 में विधानसभा चुनावों से पहले बरछवाड़ पंचायत के मुख्यालय पर एक शिलान्यास पट्टिका पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने 62 करोड़ से सीरखड्ड के तटीकरण के लिए लगाई थी। लेकिन, दो वर्ष बीत जाने के बाद भी शिलान्यास पट्टिका से आगे काम नहीं हो सका है। आपदा सिर पर मंडरा रही है और ग्रामीण अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं। हरी बैहना पंचायत के एक किलोमीटर क्षेत्र में खड्ड ने भारी तबाही मचाई थी। लेकिन, प्रभावितों को मुआवजे के नाम पर एक पैसा तक नहीं मिल सका है। गांव के 25 घरों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

घरों से सीर खड्ड की दूरी 50 मीटर से भी कम है। ऐेसे में आपदा आने पर इस गांव में भयंकर तबाही मच सकती है। ग्राम पंचायत हरी बैहना के प्रतिनिधियों ने कई बार प्रस्ताव पारित करके सरकार को भेजे हैं। लेकिन, परिणाम शून्य ही रहे। बरच्छवाड़ और जाहू के पास तटीकरण हुआ। लेकिन, इस गांव के पास तटीकरण का कार्य करना सरकार भूल गई है। इस खड्ड के तटीकरण का जिम्मा आईपीएच विभाग को सौंपा गया है। स्थानीय पंचायत प्रधान दुनी चंद, लेखराज, डॉ. विनोद ठाकुर, राकेश कुमार, जागीर सिंह, दिला राम, लेख राज, योगराज, राजू राम, नानक चंद ने कहा कि यदि शीघ्र ही प्रशासन और सरकार नहीं जागी तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। उधर, आईपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता प्रमोद वैद्य ने कहा कि सीरखड्ड के तटीकरण का प्रारूप तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया है।
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