मंडी। जिला मंडी के चौथे मत्स्य फार्म थुनाग तहसील के जंजैहली में जल्द ट्राउट मछलियां डाली जाएंगी। पिछले साल आपदा के दौरान फार्म के लिए लगाई गई पाइप लाइन के बहने से मछलियां डालने का मामला अटक गया था। अब मत्स्य विभाग ने यहां जल्द ट्राउट मछलियां डालने का निर्णय लिया है। ऐसे में सिराज के लोगों को घर-द्वार मछली के बीज की सुविधा भी मिल जाएगी।
जिले में एक हजार परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य कारोबार से जुड़े हैं। इनमें 107 किसान ट्राउट के हैं, जबकि सात किसान कॉर्प के हैं जो अपने यहां तालाब बनाकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ बना रहे हैं। जिले में सालाना 108.95 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का उत्पादन हो रहा है। इसकी सप्लाई मंडी ही नहीं, दूसरे जिलों में भी हो रही है।
जिले में सक्रिय 597 मछुआरे सालाना नदी-नकायों से 744.69 मीट्रिक टन मछलियां पकड़ रहे हैं। मछली पालन करने वाले किसानों को कई सुविधाएं मछली विभाग की ओर से दी जा रही हैं।
कॉमन और अमूर कॉर्प का एक और ट्राउट का बीज चार रुपये में
जिले में बनाए तीन मत्स्य फार्मों के तहत सुंदरनगर के अलसू मत्स्य फार्म में कॉमन कॉर्प और अमूर कॉर्प का प्रजनन इन दिनों शुरू हो गया है। मई में किसानों को इसके बीज मिलने शुरू हो जाएंगे। एक रुपये में एक बीज मिलेगा। महाशीर मत्स्य फार्म मछियाल बड़ोन जोगिंद्रनगर और ट्राउट फार्म बरोट में भी ट्राउट का प्रजनन शुरू हो गया है। मई से एक बीज चार रुपये के हिसाब से किसानों को दिया जाएगा। वहीं, रोहू और मृगल कॉर्प का प्रजनन बरसात के दिनों होगा। इसके बीज अगस्त में मिलेंगे।
फेंकवा जाल योजना के तहत 187 को मिलेंगे लाइसेंस
जिला मंडी के नदी-नकायों में जाल फेंककर मछलियां पकड़ने वाले 187 मछुआरों को लाइसेंस दिए जाएंगे। इसके लिए 3,000 रुपये देने होंगे जबकि 25 फीसदी अनुदान मिलेगा। अभी तक 70 लोगों को विभाग की ओर से स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके अलावा मछुआरों को मछलियां बाजार तक पहुंचाने के लिए वाहनों पर भी अनुदान दिया जा रहा है।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में किसानों का रूझान बढ़ा है। जंजैहली में भी जल्द मत्स्य फार्म में मछलियां डाल दी जाएंगी। लोगों को घर-द्वार बीज मिल सकेंगे। साथ ही किसानों को जागरूक कर उन्हें सरकार की योजनाओं को फायदा दिलाया जा रहा है। बिना लाइसेंस मछलियां पकड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
-नीतू सिंह, सहायक मत्स्य पालन निदेशक, मंडी।