मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने लोक निर्माण विभाग के दो सहायक अभियंताओं से वसूली करने के आदेशों को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने विभाग की ओर से वसूली राशि को अभियंताओं के पक्ष में लौटाने के आदेश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य डीके शर्मा ने मंडी सर्किट बेंच के दौरान लोक निर्माण विभाग के मंडी क्षेत्र में कार्यरत सहायक अभियंता सोहन लाल और रूप लाल भारद्वाज से विभाग द्वारा की वसूली को निरस्त करते हुए वसूल की गई राशि को लौटाने का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता एसपी चटर्जी के माध्यम से ट्रिब्यूनल में दायर याचिकाओं के मुताबिक उक्त याचिकाकर्ताओं को विभाग की ओर से एश्योरड कैरियर प्रोग्रेशन स्कीम के तहत 24 साल का कार्यकाल पूरा करने पर सेवा संबंधी लाभ दिए गए थे। लेकिन, बाद में विभाग ने आदेश पारित किए थे कि जूनियर इंजीनियर को 8 और 24 साल के कार्यकाल पूरा होने पर वेतन वृद्धियां नहीं दी जाएंगी। इन आदेशों के तहत सोहन लाल से 95246 रुपये और रूप लाल भारद्वाज से 91247 रुपये की राशि वसूल कर ली थी।
याचिकाकर्ताओं ने इस वसूली को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। अधिवक्ता का तर्क था कि उच्चतम न्यायालय की स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह मामले में व्यवस्था दी गई है कि अगर क्लास तीन व चार के अधिकारियों को अधिक राशि अदा की गई हो तो इसकी वसूली नहीं की जा सकती। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि इन याचिकाओं के रिकार्ड से जाहिर होता है कि सेवानिवृत्ति के समय उक्त अभियंताओं के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई लंबित नहीं थी। ऐसे में उनसे राशि की वसूली करना गैरकानूनी है। ट्रिब्यूनल ने याचिकाओं को स्वीकारते हुए याचिकाकर्ताओं से वसूली करने के आदेशों को निरस्त कर दिया। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने विभाग को वसूल की गई राशि को लौटाने के भी निर्देश दिए हैं।