सुरक्षा कारणों के चलते पहले स्थानीय लोगों को भी नहीं मिल पाता प्रवेश
अब परियोजना प्रबंधन जरूरी हिदायतों के साथ दे रहा प्रवेश की अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल की छपरोट स्थित बस्सी परियोजना की रेजरवायर को अब पर्यटक निकट से निहार सकेंगे। परियोजना प्रबंधन ने कुछ जरूरी हिदायतों के साथ प्रवेश की अनुमति देनी शुरू कर दी है। पहले सुरक्षा कारणों के चलते स्थानीय लोगों को भी रेजरवायर के समीप टहलने की अनुमति नहीं मिल पाती थी, लेकिन अब यहां पर सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार कर पूरी एहतियात के साथ मनोरंजन करने का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को यहां पर पिकनिक मनाने पहुंचे पर्यटकों ने परियोजना प्रबंधन के इस प्रयास की सराहना की।
जानकारी के अनुसार यहां पर ट्रॉली में पर्यटकों को रोमांच का सफर भी जल्द करवाया जाएगा। छपरोट में रेजरवायर के पार्क, निरीक्षण कुटीर और पर्यटकों को बैठने के लिए पुख्ता प्रबंध में सुधार करने के प्रयास जारी हैं। रेजरवायर में विदेशी परिंदों को भी उतारने की तैयारी परियोजना प्रबंधन ने शुरू कर दी है। वहीं, पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कैफे हाउस के संचालन पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए झूलों की सुविधा में भी विस्तार करने का निर्णय लिया गया है। लाखों रुपये छपरोट रेजर वायर परिसर को चकाचक करने में खर्च किए गए हैं। शानन संपर्क मार्ग से रेजरवायर तक करीब आठ किलोमीटर सड़क की हालत को भी सुधार लिया गया है। ऐसे में 58 साल पुरानी रेजर वायर में पर्यटकों के गुलजार होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
परियोजना के सहायक अभियंता (सिविल) संजय कुमार के अनुसार प्रथम चरण में लाखों का खर्च रेजर वायर परिसर के जीर्णोद्धार पर खर्च करने के बाद अब 11.50 मीटर ट्रॉली के ट्रैक को सुधारने को लेकर परियोजना प्रबंधन के उच्चाधिकारियों से बजट की मांग की है।
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रेजर वायर में है 80 हजार क्यूसिक मीटर पानी
जोगिंद्रनगर शहर से छह किलोमीटर की दूरी पर साल 1966 में बनी छपरोट स्थित 66 मेगावाट की पन विद्युत बस्सी परियोजना की रेजरवायर को 58 वर्ष पूरे हो गए हैं। यहां से पानी की आपूर्ति से सालाना 100 करोड़ की आमदनी परियोजना प्रबंधन को होती है। हिमाचल प्रदेश की इस पन विद्युत परियोजना में साढ़े 16 मेगावाट की क्षमता वाले चार टरबाइन कार्य कर रहे हैं। छपरोट स्थित रेजरवायर में 80 हजार क्यूसिक मीटर पानी होने पर इनसे प्रतिदिन 15 लाख 84 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। बस्सी परियोजना के आरई जितेंद्र कुमार ने कहा कि छपरोट स्थित रेजरवायर में पर्यटकों की आमद बढ़े, इसके लिए लाखों रुपये का खर्च किए जा रहे हैं। ट्रॉली के संचालन के लिए बजट की मांग की जा रही है।