अस्पताल में दो कर्मचारियों के भरोसे काम
रोजाना 50 से अधिक आवेदन, करीब सात हजार मामले लंबित
पुराने रिकॉर्ड तलाशने में भी हो रही देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य मामलों में प्रमाणपत्र के लिए तीन माह तक की तारीख दी जा रही है, जबकि बेहद जरूरी मामलों में भी एक माह तक का समय लग रहा है। कर्मचारियों की कमी और पुराने रिकॉर्ड तलाशने में हो रही देरी के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
अस्पताल की जन्म-मृत्यु पंजीकरण शाखा में पहले तैनात दो कर्मचारियों के तबादले के बाद अब प्रतिनियुक्ति पर आए दो कर्मचारी काम संभाल रहे हैं। इनमें से एक कर्मचारी न्यायालय और प्रशासनिक कार्यों में भी व्यस्त रहता है। वहीं, दूसरे कर्मचारी पर आवेदन की औपचारिकताएं पूरी करवाने के साथ पुराने रिकॉर्ड तलाशने की जिम्मेदारी है। ऐसे में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
अस्पताल में रोजाना 50 से अधिक लोग जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करते हैं। वर्ष 2024 से पहले के करीब 15 हजार लंबित मामलों में से अब लगभग सात हजार मामले शेष हैं। हालांकि, पुराने रिकॉर्ड की जांच में अधिक समय लगने के कारण लंबित मामलों का निपटारा अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में वर्ष 1970 के बाद का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इससे पहले के मामलों में पंचायतों के रिकॉर्ड से मिलान करना पड़ता है। रिकॉर्ड उपलब्ध न होने पर आवेदकों को शपथपत्र (एफिडेविट) के माध्यम से प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इससे लोगों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी डॉ. अशोक चौहान ने बताया कि लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए कर्मचारी प्रयास कर रहे हैं। बेहद जरूरी मामलों में प्राथमिकता के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुराने रिकॉर्ड का उचित रखरखाव न होने के कारण उन्हें तलाशने और जांचने में भी कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।