मंडी। जिला प्रशासन सुकेती और ब्यास क्षेत्रों में अवैध मलबा डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारियों के साथ खड्डों और ब्यास के किनारों का निरीक्षण कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान की जाएगी।
इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में सुकेती खड्ड के किनारे आईटीआई पुल से पुलघराट और गुटकर तक लाखों टन मलबा पड़ा है। इससे खड्ड संकरी हो रही है। 2022 की आपदा में सुकेती के उफान पर आने से तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।
इसमें घर बहने के साथ-साथ उपजाऊ जमीन भी बह गई थी। इसके बावजूद मलबा डंप करने का सिलसिला जारी है। इससे जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विनय कुमार ने बताया कि आठ महीने पहले भी मलबा डंप करने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
मगर रात और सुबह के समय मलबा डंप करने की वजह से इनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। नगर निगम को भी अवैध मलबा डंपिंग वाले स्थानों पर बाड़बंदी करने या सीसीटीवी कैमरे लगाने की सलाह दी गई है। मलबा डंप करने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
नगर निगम क्षेत्र में मलबा फेंककर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर पैनी नजर है। कर्मचारी दिन-रात विभिन्न स्थानों पर मलबा गिराने वालों की पहचान कर रहे हैं। हाल में कुछ लोगों को सड़क किनारे मलबा फेंकते हुए पकड़ा गया है और उन पर कार्रवाई की जा रही है।
-एचएस राणा, आयुक्त, नगर निगम मंडी
ब्यास और सुकेती में सड़क किनारे मलबा डंप करने वालों पर सख्ती से निपटा जाएगा। जल्द प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर जायजा लिया जाएगा और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
- ओम कांत ठाकुर, एसडीएम, मंडी
मलबा गिराने वाले निगम कार्यालय नहीं पहुंचे
नगर निगम के नेला वार्ड में नदी के किनारे मलबा फेंकने वाले तीसरे दिन भी निगम कार्यालय में नहीं पहुंचे। शनिवार को निगम की टीम ने लोगों की शिकायतों के बाद मौके का दौरा किया था। तब लोगों ने उन्हें मलबा डंप करने वालों की वीडियो और फोटो उपलब्ध करवाए थे। निगम के सफाई निरीक्षक सतीश ने बताया कि मंगलवार को उनसे फिर संपर्क किया गया। अब उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।
.दुलही जाने वाला संपर्क मार्ग। संवाद
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