मंडी। जिले में बेरोजगार युवा नकदी फसलों के उत्पादन के साथ-साथ अब मत्स्य पालन की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। जिले में एक साल की अवधि में 16 बेरोजगार युवाओं ने कार्प मछली पालन योजना को अपनाया है। सरकार की ओर से योजना के तहत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस वर्ष दो और बेरोजगारों को योजना के तहत स्वीकृति मिल चुकी है और दोनों ने अपने तालाबों का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है।
मंडी की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और पर्याप्त जल संसाधन मत्स्य पालन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना वर्ष 2024 से आरंभ की गई है। योजना का उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को कार्प मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आय में वृद्धि करना है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाब निर्माण की लागत 12.40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें तालाब निर्माण के लिए 8.40 लाख रुपये और इनपुट लागत (जैसे बीज व चारा) के लिए 4 लाख रुपये शामिल हैं। इस लागत का 80 प्रतिशत अनुदान सभी श्रेणियों के लाभार्थियों को प्रदान किया जा रहा है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भी मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना में समान लागत पर सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक की अनुदान सहायता दी जाती है। चयनित युवाओं को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, फीड प्रबंधन तथा विपणन से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विभाग समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित कर युवाओं को मत्स्य पालन की बारीकियों से अवगत करवा रहा है।
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योजना का लाभ लेने के इच्छुक बेरोजगार व्यक्ति के पास स्वयं की उपयुक्त भूमि होना आवश्यकहै। कम से कम सात वर्षों के लिए पट्टे पर भी भूमि लेकर योजना का लाभ लिया जा सकता है।
-नीतू सिंह, सहायक निदेशक मत्स्य