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Mandi News: फिर खुले में फेंक आग के हवाले किया मेडिकल बायो वेस्ट

Mon, 19 Aug 2024 06:07 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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जोगिंद्रनगर के ग्रामीण क्षेत्र में खुले में फेंकी गई मेडिकल बायो बेस्ट सामग्री। संवाद
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जोगिंद्रनगर के ग्रामीण क्षेत्र में खुले में फेंके इंजेक्शन से संक्रामक रोग फैलने की आशंका, विभाग बेखबर
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मरीजों और मवेशियों के उपचार में प्रयोग में लाई सामग्री के निस्तारण में कोताही पर कार्रवाई की उठी मांग

संवाद न्यूज एजेंसी

जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में फिर मेडिकल बायो वेस्ट और दवाइयों को खुले में फेंक कर आग के हवाले करने का मामला सामने आया है। कचरे के ढेर में मवेशियाें के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली बायो वेस्ट सामग्री को आग के हवाले कर स्वच्छता के दावों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वहीं, नियमों को दरकिनार करने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र में मिले बायो बेस्ट के ढेर में काफी संख्या में दवाइयां, इंजेक्शन और मवेशियों के इस्तेमाल में लाए जाने वाले इंजेक्शन और उपचार में प्रयोग की गई सामग्री आग के हवाले की गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक कचरे के ढेर में इंजेक्शन, दवाइयों के अलावा उपयोग में लाई गई बैंडेड और अन्य बायो वेस्ट भी आग के हवाले किया गया है। इसकी जांच संबंधित विभाग ने शुरू कर दी है। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए अपने स्तर पर जरूरी कार्रवाई अमल में लानी शुरू कर दी है। वहीं, स्थानीय प्रशासन भी इस मामले में सक्रिय हुआ है।
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बता दें कि जोगिंद्रनगर उपमंडल में अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल क्लीनिकों के लिए बायो वेस्ट कचरे के निस्तारण की सुविधा जोगिंद्रनगर में अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में कई बार कचरे में बायो मेडिकल वेस्ट भी घुल मिल रहा है। रात के अंधेरे में कचरे के ढेर में फेंका जा रहा बायो मेडिकल बेस्ट और इसमें शामिल मवेशियों और मरीजों के उपचार में इस्तेमाल सिरिंज से अगर कोई चोटिल हो जाता है तो रक्त के माध्यम से संक्रामक रोग फैल जाते हैं।
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हालात ये हैं कि कचरे के ढेरों से लबालब हो चुकी गुगली खड्ड में हर प्रकार के कचरे को बहाया जा रहा है। खड्ड का पानी मछयाल और रणा खड्ड से होकर मिलता है। जहां पर कई पेयजल योजनाएं क्रियान्वित हैं। इस बारे में डॉ. आंचल ने बताया कि मवेशियों के लिए मेडिकल कचरा कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए इसका निस्तारण वैज्ञानिक ढंग से ही होना चाहिए। मरीजों और मवेशियों के प्रयोग में लाई गई सिरिंज, बैंडेड, पैथोलॉजी बेस्ट, कैप्सूल, पीपीई किट, मास्क, गलब्ज यह सब मेडिकल बायो बेस्ट की श्रेणी में आते हैं। उधर, तहसीलदार जोगिंद्रनगर डॉ. मुकुल शर्मा ने बताया कि बायो बेस्ट को आग के हवाले करने का मामला ध्यान में आया है। फील्ड रिपोर्ट लेकर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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